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Abhishek Banerjee: कोलकाता. तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की एक चुनावी टिप्पणी को लेकर कलकत्ता हाइकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जतायी है. अदालत ने कहा कि अगर चार मई को चुनाव परिणाम अलग होते, तो राज्य की कानून व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ सकती थी. दरअसल, 27 अप्रैल को आरामबाग में चुनाव प्रचार के दौरान अभिषेक बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लिये बिना विवादित टिप्पणी की थी. उसी मामले की सुनवाई के दौरान गुरुवार को कलकत्ता हाइकोर्ट के न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने तीखी प्रतिक्रिया दी.
न्यायाधीश ने कहा – गैरजिम्मेदाराना था बयान
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने अभिषेक की टिप्पणी को दायित्वहीन यानी गैरजिम्मेदाराना करार दिया. अदालत ने कहा कि चुनाव जैसे संवेदनशील माहौल में इस तरह के बयान हालात को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते थे. न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर चुनाव परिणाम दूसरी दिशा में जाते, तो राज्य में कानून व्यवस्था हाथ से निकल सकती थी.
31 जुलाई तक राहत, विदेश जाने पर रोक
हालांकि अदालत ने फिलहाल तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव बनर्जी को राहत देते हुए 31 जुलाई तक संरक्षण प्रदान किया है. लेकिन इसके साथ कुछ शर्तें भी लगायी गयी हैं. अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस अवधि के दौरान अभिषेक बनर्जी विदेश यात्रा नहीं कर सकेंगे.
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चुनावी बयान से बढ़ गया राजनीतिक विवाद
बनर्जी की इस टिप्पणी को लेकर पहले ही राजनीतिक विवाद तेज हो चुका था. भाजपा ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अपमानजनक बताते हुए तीखा हमला बोला था. वहीं तृणमूल कांग्रेस की ओर से इसे चुनावी भाषण का हिस्सा बताया गया था. अब हाइकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी बहस के केंद्र में आ गया है.
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