बीरभूम के दूरिया एकराम अली हाइस्कूल का मामला
कोलकाता. कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बीरभूम के एक स्कूल को उन अभिभावकों को प्रवेश शुल्क वापस करने का निर्देश दिया, जिनके बेटे को कक्षा 9 में फेल होने के बावजूद ‘गलती से’ कक्षा 10 में प्रमोट कर दिया गया था. इस मामले की सुनवाई के दौरान हाइकोर्ट की न्यायाधीश अमृता सिन्हा ने स्कूल की स्थिति को लेकर पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की भूमिका पर भी नाराजगी जतायी. बताया गया है कि दुरिया एकराम अली हाइस्कूल में कक्षा 10 में 166 छात्र हैं. न्यायाधीश अमृता सिन्हा ने कक्षा रजिस्टर से नोट किया कि अधिकांश छात्र लगभग हर दिन अनुपस्थित के रूप में चिह्नित थे, केवल चार से पांच छात्र ही नियमित रूप से उपस्थित थे. वहीं, राजा शेख के बेटे के मामले में, स्कूल ने कहा कि वह कक्षा नौ में फेल हो गया था, लेकिन फिर भी उसे कक्षा 10 में प्रोमोट कर दिया गया था और कक्षा 10 में भी वह अधिकांश दिन स्कूल में अनुपस्थित था. बोर्ड के वकील ने कहा कि माध्यमिक पंजीकरण के लिए 75 प्रतिशत उपस्थिति आवश्यक है. इस पर न्यायाधीश ने कहा कि फिर उसे प्रोमोट कैसे किया गया. इसके बाद ही न्यायाधीश ने गलती से प्रोमोट किये गये सभी छात्रों के प्रवेश शुल्क को वापस करने का निर्देश दिया.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
