उत्पाद या सेवा में नुकसान होने पर उपभोक्ता को निवारण पाने का अधिकार

किसी उत्पाद या सेवा के कारण कोई नुकसान या असुविधा होने पर उपभोक्ता को निवारण पाने का पूरा अधिकार होता है. उपभोक्ता अपनी बातों को विभिन्न प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी एजेंसियों तक पहुंचा सकते हैं, जहां से उन्हें पूरा न्याय मिलेगा. इस संबंध में कलकत्ता हाइकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता देवब्रत उपाध्याय ने प्रभात खबर के ऑनलाइन पूछे गये सवालों के जवाब दिये.

कोलकाता.

किसी उत्पाद या सेवा के कारण कोई नुकसान या असुविधा होने पर उपभोक्ता को निवारण पाने का पूरा अधिकार होता है. उपभोक्ता अपनी बातों को विभिन्न प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी एजेंसियों तक पहुंचा सकते हैं, जहां से उन्हें पूरा न्याय मिलेगा. इस संबंध में कलकत्ता हाइकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता देवब्रत उपाध्याय ने प्रभात खबर के ऑनलाइन पूछे गये सवालों के जवाब दिये.

श्री उपाध्याय ने कहा कि सबसे पहले हमें मूल समस्या की पहचान करनी होगी. क्या गलत हुआ है, यह स्पष्ट करना होगा. इसके लिए सभी प्रासंगिक विवरण, जैसे उत्पाद या सेवा विवरण, तिथियां और कंपनी के साथ कोई भी संचार हुआ हो, तो उसके दस्तावेज एकत्र करने होंगे. इसके बाद साक्ष्य के रूप में रसीदें, इमेल, फोटो या अन्य दस्तावेज एकत्र करें, जो आपकी शिकायत का समर्थन करते हों. अपनी समस्या के निवारण के लिए पहले कंपनी की ग्राहक सेवा से संपर्क करें. अपनी समस्या को स्पष्ट रूप से समझायें और अपने साक्ष्य प्रदान करें. यदि फिर भी समस्या का समाधान नहीं होता है, तो औपचारिक रूप से शिकायत पत्र लिखें. यदि फिर भी कंपनी की ओर से कोई संतोषजनक जवाब मिलता है, तो स्थानीय उपभोक्ता संरक्षण एजेंसियों या बेटर बिजनेस ब्यूरो (बीबीबी) के पास शिकायत दर्ज करें. ऐसे में कानूनी विशेषज्ञ से कानूनी मदद लेना बेहतर होगा. श्री उपाध्याय ने बताया कि किसी भी उपभोक्ता को उन उत्पादों या सेवाओं से सुरक्षित रहने का अधिकार है, जो आपके स्वास्थ्य, आर्थिक, शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक या सुरक्षा को नुकसान पहुंचा सकती हैं. उपभोक्ता उत्पादों के बारे में स्पष्ट और सत्य जानकारी के हकदार हैं, जिसमें सामग्री, सुरक्षा चेतावनियां, घटक, वारंटी, समाप्ति, गुणवत्ता, उत्पाद की सभी आवश्यक जानकारी और कीमत शामिल हैं.

जगदल से अश्विनी कुमार का सवाल : मैंने 2006 में एक जमीन रजिस्ट्री करवायी थी और तब से नगरपालिका का टैक्स भी जमा कर रहा हूं. लेकिन हमने जमीन का परचा (म्यूटेशन) नहीं कराया था. लेकिन 2018 में जब म्यूटेशन कराने गये, तो पता चला कि उस जमीन पर किसी और ने म्यूटेशन कराया है, अब हमें क्या करना चाहिए?

जवाब : म्यूटेशन एक संबंधित विभाग में रिकॉर्ड रखने वाला दस्तावेज है, म्यूटेशन से संपत्ति पर कोई अधिकार, शीर्षक, हित नहीं बनता है, इसलिए यदि अधिकारी 2006 के पंजीकृत विलेख के अनुसार आपके नाम पर म्यूटेशन नहीं करते हैं, तो आप आरटीआइ के माध्यम से विभाग से उस व्यक्ति के बारे में सभी आवश्यक दस्तावेज की मांग करिये, जिसके आधार पर उक्त व्यक्ति ने अपने नाम का म्यूटेशन कराया है. इसके बाद आप उक्त म्यूटेशन पर सवाल उठाते हुए विभाग को एक पत्र लिखें और विभागीय अधिकारी से पूछें कि आपके नाम पर म्यूटेशन क्यों नहीं किया जाना चाहिए. यदि उत्तर नकारात्मक है, तो उचित न्यायालय, फोरम में उक्त आदेश को चुनौती दे सकते हैं.

हावड़ा से सरोजा देवी का सवाल : मेरे पति के विवाहेतर संबंध हैं, जिसके बारे में मैंने उनके मोबाइल से सबूत एकत्र किये हैं. क्या मैं आपराधिक मामला दर्ज कर सकती हूं?

जवाब : व्यभिचार या विवाहेतर संबंध आपराधिक अपराध नहीं है. यह तलाक का आधार है. इसलिए आप अपने पति के साथ सभी विवादों को निबटाने की कोशिश करें और उन्हें माफ करके विवाह को जारी रखें. यदि समझौता सकारात्मक तरीके से नहीं हुआ, तो आप चाहें, तो तलाक याचिका दायर कर सकती हैं.

रिसड़ा से गंगा प्रसाद का सवाल : मेरे घर से मेरी संपत्ति की ऑरिजनल दलील और दस्तावेज खो गये हैं, मुझे क्या करना चाहिए?

जवाब : सबसे पहले तुरंत स्थानीय पुलिस थाने में जीडी दर्ज करायें, फिर स्थानीय समाचार पत्र में इसकी सूचना प्रकाशित करायें. तत्पश्चात संबंधित रजिस्ट्रार कार्यालय से दस्तावेजों के विलेख की प्रमाणित प्रति प्राप्त करें.

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Published by: Bijay kumar

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