सरकारी कर्मचारियों के डीए मामले की सुनवाई अब मार्च में

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ता (डीए) से संबंधित मामले की सुनवाई फिर टल गयी.

कोलकाता/नयी दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ता (डीए) से संबंधित मामले की सुनवाई फिर टल गयी. अब मार्च महीने में नयी बेंच गठित कर डीए मामले की सुनवाई होने की बात कही गयी है. हालांकि, कोई तिथि तय नहीं की गयी है. मंगलवार को सुनवाई की शुरुआत में ही अदालत ने कहा कि इस मामले की लंबी सुनवाई की जरूरत है. न्यायमूर्ति ऋषिकेश राय ने मार्च महीने में सुनवाई का निर्देश दिया. राज्यकर्मी केंद्र के समान डीए की मांग कर रहे हैं.

ओबीसी : राज्य की याचिका पर अब सुनवाई 28-29 को

कोलकाता/नयी दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में 2010 से कई जातियों को दिये गये अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) दर्जे को रद्द करने के कलकत्ता हाइकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वालीं याचिकाओं पर सुनवाई मंगलवार को टाल दी. अब मामले की सुनवाई 28 और 29 जनवरी को होगी. न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने इस बात पर गौर करते हुए सुनवाई को स्थगित कर दिया कि इस मसले पर विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता है. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने मामले में अपना हलफनामा दायर किया है. वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पैरवी की. सुप्रीम कोर्ट ने पहले कहा था कि धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता. हाइकोर्ट ने पिछले साल 22 मई को पश्चिम बंगाल में कई जातियों को 2010 से दिया गया ओबीसी का दर्जा रद्द कर दिया था. सार्वजनिक क्षेत्र की नौकरियों व सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण को अवैध करार दिया था. अपने फैसले में उच्च न्यायालय ने कहा था : इन समुदायों को ओबीसी घोषित करने के लिए धर्म ही एकमात्र मानदंड प्रतीत होता है. उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि हटाये गये वर्गों के नागरिक, जो पहले से ही सेवा में हैं या आरक्षण का लाभ ले चुके हैं, या राज्य की किसी भी चयन प्रक्रिया में सफल हुए हैं, उनकी सेवाएं इस फैसले से प्रभावित नहीं होंगी. कुल मिलाकर, उच्च न्यायालय ने अप्रैल, 2010 और सितंबर, 2010 के बीच दिये गये 77 वर्गों के आरक्षण को रद्द कर दिया था.

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