चुनावों में राजनीतिक लाभ के लिए नयी योजनाओं की घोषणा कर रही है सरकार

बालुरघाट के भाजपा विधायक और प्रख्यात अर्थशास्त्री डॉ अशोक लाहिड़ी ने गुरुवार को अपने साल्टलेक स्थित कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस किया.

बोले डॉ अशोक लाहिड़ी

संवाददाता, कोलकाता

बालुरघाट के भाजपा विधायक और प्रख्यात अर्थशास्त्री डॉ अशोक लाहिड़ी ने गुरुवार को अपने साल्टलेक स्थित कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस किया. उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा घोषित दो परियोजनाओं की प्रामाणिकता पर चर्चा की. इस दौरान भाजपा विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री ने दो नयी सरकारी योजनाएं ”आमादेर पाड़ा, आमादेर समाधान” और ”श्रमश्री योजना” की घोषणा की है. भाजपा विधायक ने इन योजनाओं को चुनाव से पहले सांता क्लॉज का उपहार बताते हुए मजाक उड़ाया. कहा- सरकार का मुख्य उद्देश्य 2026 के चुनावों में राजनीतिक लाभ प्राप्त करना है, न कि वास्तविक जनसेवा.

उन्होंने आंकड़े देते हुए कहा कि ”आमादेर पाड़ा, आमादेर समाधान” योजना में प्रत्येक बूथ की लागत 10 हजार रुपये होगी. राज्य में बूथों की संख्या 94,479 है. लागत लगभग साढ़े नौ हजार करोड़ रुपये है. डॉ लाहिड़ी ने कहा : मुख्यमंत्री ने कम से कम यह तो स्वीकार किया है कि राज्य में समस्याएं हैं. प्रत्येक मोहल्ले में समाधान प्रदान करने के नाम पर राज्य सरकार वास्तव में लागत बढ़ाने की कोशिश कर रही है. तृणमूल ने यह तरीका केवल प्रचार के लिए अपनाया है. इसके अलावा, तृणमूल नेताओं को काफी प्रसिद्धि मिल रही है.

अर्थशास्त्री डॉ लाहिड़ी ने सवाल उठाया कि जब राज्य सरकार की आर्थिक स्थिति कमजोर है, जब महंगाई भत्ता (डीए) या नौकरियां देना संभव नहीं है, तो इतनी महंगी परियोजना शुरू करना कितना उचित है. इससे राज्य का कर्ज बढ़ेगा. इसके बाद डॉ लाहिड़ी ने श्रमश्री योजना पर अपनी राय रखी. इस परियोजना में कहा गया है कि अगर प्रवासी मजदूर राज्य लौटते हैं, तो उन्हें एकमुश्त 5,000 रुपये और अगले एक साल तक 5,000 रुपये प्रति माह दिये जायेंगे. डॉ लाहिड़ी ने इस परियोजना की प्रभावशीलता पर संदेह व्यक्त किया. उनके अनुसार, अगर सभी प्रवासी मजदूर लौट आते हैं, तो सालाना लागत लगभग 14,625 करोड़ रुपये होगी. हालांकि, ज्यादातर प्रवासी मज़दूर दूसरे राज्यों में 5,000 रुपये से कहीं ज्यादा कमाते हैं, इसलिए वे वापस नहीं लौटेंगे.

भाजाप विधायक ने दुर्गा पूजा समितियों को सरकार द्वारा दिए जाने वाले धन पर भी कटाक्ष किया. उन्होंने कहा कि बंगाली मूर्ख नहीं हैं. लोग समझते हैं कि तृणमूल सरकार की ये परियोजनाएं वोट-केंद्रित हैं. इस सरकार का लोगों की समस्याओं को हल करने का कोई इरादा नहीं है, क्योंकि परियोजना की घोषणा तो हो जाती है, लेकिन बजट में इसका कोई जिक्र नहीं होता, और इस पैसे को कैसे खर्च किया जायेगा, इसकी कोई उचित योजना भी नहीं है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कल कोलकाता मेट्रो का उद्घाटन किये जाने का मुद्दा भी उठाया और कहा कि राज्य सरकार हमेशा वंचित करने की बात करती है, अगर केंद्र सरकार वंचित करती, तो मेट्रो रेल का इतना विस्तार नहीं हो पाता.

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By Akhilesh kumar singh

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