प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 440 करोड़ रुपए के बैंक खातों को फ्रीज किये जाने के पीछे वित्तीय हेरफेर से जुड़ा मामला सामने आया है. जांच एजेंसी के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी फंड से एक निजी एविएशन कंपनी को मोटी रकम ट्रांसफर की, जिससे लग्जरी बिजनेस जेट और हेलीकॉप्टर खरीदे गये. इसके बाद, पार्टी ने उन्हीं हवाई जहाजों का इस्तेमाल करने के लिए फिर से एविएशन कंपनी को भारी-भरकम किराया चुकाया.
जेट और हेलीकॉप्टर से जुड़े मामले को समझें
ईडी की ओर से जारी बयान और जांच के अनुसार, अप्रैल 2023 से जून 2026 के बीच टीएमसी के बैंक खातों से लगभग ₹160 करोड़ रुपए केयरवेल एविएशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (Carewell Aviation) और उसकी सहयोगी संस्था को ट्रांसफर किये गये. इसके बाद, इस एविएशन कंपनी ने 82.96 करोड़ एक नयी संबंधित इकाई को ट्रांसफर किये. कुल 112 करोड़ रुपए खर्च करके 2 हाई-प्रोफाइल हवाई संपत्तियां खरीदी गयीं.
- एम्ब्रायर लेगेसी 600 (Embraer Legacy 600): ब्राजील निर्मित एम्ब्रायर लेगेसी 600 एक अति-आधुनिक और लग्जरी बिजनेस जेट है.
- अगस्ता 109 ग्रैंडन्यू (Agusta 109 GrandNew): इटली की लियोनार्डो कंपनी द्वारा निर्मित अगस्ता 109 ग्रैंडन्यू वीवीआईपी ट्विन-इंजन हेलीकॉप्टर है.
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केमैन आइलैंड्स से संदिग्ध विदेशी फंडिंग
जांच एजेंसी को यह भी पता चला है कि वर्ष 2023 में अगस्ता हेलीकॉप्टर की खरीदारी के लिए केमैन आइलैंड्स (Cayman Islands) स्थित एक विदेशी संस्था से 1.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 14-15 करोड़ रुपए) का अनसिक्योर्ड लोन (Unsecured Loan) भी लिया गया. टैक्स हैवन के रूप में जाने जाने वाले केमैन आइलैंड्स से इस विदेशी फंड के आने की वजह से मामला और अधिक संदिग्ध हो गया है.
अपनी कार खरीदकर खुद ही किराया देने जैसी स्थिति
ईडी की जांच में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह निकला कि जिस लग्जरी जेट और हेलीकॉप्टर को टीएमसी के पैसे से खरीदा गया था, उन्हें बाद में खुद टीएमसी को ही चार्टर्ड सेवाओं के लिए किराये पर दे दिया गया. पार्टी के शीर्ष नेताओं और वीवीआईपी (VVIP) उड़ानों के नाम पर किराये के बहाने टीएमसी के खातों से करोड़ों रुपए फिर से एविएशन कंपनी में ट्रांसफर किये गये.
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ईडी पता लगा रही- असली लाभार्थी कौन?
ईडी का मानना है कि यह पूरा वित्तीय ढांचा पार्टी के फंड को रूट करने और वास्तविक लाभार्थियों की पहचान छिपाने के उद्देश्य से तैयार किया गया था. फिलहाल जांच एजेंसी इस बात की पड़ताल कर रही है कि इस फर्जीवाड़े का असली राजनीतिक और व्यक्तिगत लाभार्थी कौन था.
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