असली तृणमूल और सिंबल विवाद पर चुनाव आयोग को जल्द लेना होगा फैसला, 24 को है राज्यसभा चुनाव

पश्चिम बंगाल की 3 राज्यसभा सीटों पर उपचुनाव ने तृणमूल कांग्रेस के अंदर वर्चस्व की जंग को तेज कर दिया है. चुनाव आयोग (ECI) को 24 जुलाई तक 'असली TMC' और 'जोड़ा फूल' सिंबल पर फैसला लेना होगा. यह मामला ममता बनर्जी बनाम रीतब्रत बनर्जी के बीच अटक गया है.

ECI Dilemma Bengal Rajya Sabha Bypolls: पश्चिम बंगाल की 3 राज्यसभा सीटों पर 24 जुलाई 2026 को होने वाले उपचुनाव ने राज्य के सियासी पारे को चरम पर पहुंचा दिया है. निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद अब यह मुकाबला सिर्फ सीटों को जीतने तक सीमित नहीं रह गया है. यह उपचुनाव निर्वाचन आयोग को उस सबसे बड़े और संवेदनशील कानूनी सवाल का फैसला करने के लिए मजबूर कर सकता है, जो पिछले कुछ समय से लंबित है- असली तृणमूल कांग्रेस कौन-सी है? ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिह्न पर किसका हक है?- ममता बनर्जी या रीतब्रत बनर्जी?

क्यों आयी ऐसी परिस्थिति

यह स्थिति तब पैदा हुई, जब तृणमूल कांग्रेस के 3 राज्यसभा सांसदों- सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाईक ने पिछले महीने संसद के उच्च सदन और पार्टी से इस्तीफा दे दिया. इन नेताओं ने विधानसभा चुनाव में पार्टी की करारी शिकस्त के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठाये थे. पार्टी में टूट के बाद ममता बनर्जी गुट और रीतब्रत बनर्जी गुट के बीच तृणमूल कांग्रेस पार्टी पर कब्जे की जंग छिड़ी हुई है.

20 जुलाई की समयसीमा और व्हिप का कानूनी संकट

पार्टी में वर्चस्व की जंग लड़ रहे दोनों ही गुट- ममता बनर्जी समर्थित धड़ा और विपक्ष के नेता रीतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला बागी धड़ा, एक ही समय में खुद को मूल पार्टी घोषित कर रहे हैं. चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को अपने-अपने संगठनात्मक दावों और दस्तावेजों को जमा करने के लिए 20 जुलाई की समयसीमा तय की है. इस बीच, 24 जुलाई को होने वाले मतदान में व्हिप (Whip) जारी करने को लेकर कानूनी पेंच फंस गया है.

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तृणमूल के 80 में से 65 विधायक रीतब्रत बनर्जी के साथ

विधानसभा में कुल 80 तृणमूल विधायकों में 65 विधायक बागी नेता रीतब्रत बनर्जी के साथ खड़े हैं. यदि ममता गुट राज्यसभा उम्मीदवार के लिए कोई व्हिप जारी करता है, तो बागी विधायक दल उसे मानने से इनकार कर सकता है, जिससे दल-बदल कानून (Anti-Defection Law) और पार्टी की आधिकारिक मान्यता को लेकर अभूतपूर्व संवैधानिक संकट खड़ा हो जायेगा.

असली तृणमूल और सिंबल का फैसला जल्द

चुनाव आयोग से खबर मिली है कि राज्यसभा चुनाव की निष्पक्षता और तकनीकी शुद्धता बनाये रखने के लिए आयोग को 24 जुलाई के मतदान से पहले या उसके तुरंत बाद ‘असली तृणमूल कांग्रेस’ के विवाद पर कोई अंतरिम या ठोस फैसला लेना पड़ सकता है. बागी गुट दो-तिहाई विधायी बहुमत के आधार पर पार्टी के नाम और सिंबल पर दावा ठोक रहा है. ममता गुट संगठनात्मक ढांचे और पार्टी के संविधान (वैधता 2027 तक) का हवाला देकर खुद को मजबूत बता रहा है.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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