एसआइआर : सुनवाई केंद्र में बीएलए की एंट्री की अनुमति देने से इनकार
तृणमूल कांग्रेस ने फैसले को बताया साजिश
संवाददाता, कोलकाताराज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद शुरू हुई हियरिंग के दौरान बूथ स्तरीय एजेंटों (बीएलए) को सुनवाई केंद्र में प्रवेश देने की मांग पर चुनाव आयोग ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है. आयोग ने तृणमूल कांग्रेस की इस मांग को खारिज करते हुए कहा है कि किसी भी स्थिति में बीएलए को सुनवाई केंद्र के अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जायेगी. इस मांग को लेकर तृणमूल कांग्रेस के नेता जगह-जगह प्रदर्शन कर रहे हैं. बीएलए को सुनवाई केंद्र के भीतर प्रवेश देने की मांग को लेकर हाल ही में तृणमूल कांग्रेस के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज अग्रवाल और उप चुनाव आयुक्त ज्ञानेश भारती से मुलाकात कर ज्ञापन भी सौंपा था. क्या कहना है चुनाव आयोग का आयोग के अनुसार, यदि बीएलए को सुनवाई केंद्र में जाने की अनुमति देने की मांग मानी जाती है, तो अन्य छह राष्ट्रीय और दो राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों की समान मांगों को भी मानना पड़ेगा. ऐसी स्थिति में प्रत्येक सुनवाई टेबल पर कुल 11 लोगों की मौजूदगी हो जायेगी. इनमें एक इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ईआरओ), एक असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (एईआरओ), एक माइक्रो-ऑब्जर्वर और आठ राजनीतिक दलों के आठ बीएलए शामिल होंगे. आयोग का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों की एक ही टेबल पर मौजूदगी से सुनवाई प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करना लगभग असंभव हो जायेगा. इसी कारण सुनवाई केंद्र के भीतर बीएलए की मौजूदगी की अनुमति देने का कोई सवाल ही नहीं उठता. उधर, चुनाव आयोग के इस फैसले को तृणमूल कांग्रेस ने साजिश करार दिया है. तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि आयोग ने जान-बूझ कर बीएलए को अनुमति देने की मांग खारिज की है, क्योंकि आयोग को पता है कि अन्य राजनीतिक दलों के पास सभी सुनवाई टेबलों के लिए पर्याप्त संख्या में बीएलए उपलब्ध कराने की क्षमता नहीं है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
