सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी आरजी कर मेडिकल कॉलेज में नियुक्ति नहीं
राजनीतिक बदले का लगाया आरोप
संवाददाता, कोलकातासुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में अब तक पोस्टिंग नहीं मिलने से नाराज डॉ अनिकेत महतो ने सीनियर रेजिडेंट (एसआर-शिप) छोड़ने का फैसला किया है. शुक्रवार को कोलकाता प्रेस क्लब में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने इस निर्णय की घोषणा की. डॉ अनिकेत ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार राजनीतिक बदले की भावना से उनके मेडिकल करियर को समाप्त करना चाहती है.
30 लाख रुपये भरने की बाध्यता, चंदा जुटाने की घोषणा: डॉ अनिकेत ने बताया कि यदि वह स्वयं एसआर-शिप पोस्टिंग छोड़ते हैं तो राज्य सरकार को करीब 30 लाख रुपये का भुगतान करना होगा. उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी राशि उनके लिए देना संभव नहीं है. इसी कारण उन्होंने आम लोगों, सीनियर डॉक्टरों और सहकर्मियों से आर्थिक सहयोग की अपील की है. अनिकेत ने साफ कहा कि वह चंदा संग्रह कर सरकार को यह राशि चुकायेंगे.इस्तीफे से पहले कानूनी सलाह लेंगे
उन्होंने कहा कि उन्हें अब तक पोस्टिंग नहीं मिली है और मौजूदा हालात में यदि भविष्य में पोस्टिंग दी भी जाती है तो वह एक डॉक्टर के रूप में अपनी ड्यूटी सही तरीके से नहीं कर पायेंगे. इसी वजह से उन्होंने राज्य सरकार के किसी भी सरकारी अस्पताल में एसआर-शिप न करने का निर्णय लिया है. हालांकि, एसआर-शिप से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन होने के कारण वह इस्तीफे से पहले कानूनी सलाह लेंगे.आरजी कर आंदोलन से जुड़ी पृष्ठभूमि
डॉ अनिकेत आरजी कर दुष्कर्म व हत्या कांड को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन के प्रमुख चेहरों में रहे हैं. पिछले वर्ष मई में उन्हें रायगंज में पोस्टिंग दी गयी थी, जिस पर विवाद खड़ा हुआ. अनिकेत ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाइकोर्ट का रुख किया था. कलकत्ता हाइकोर्ट की सिंगल बेंच और बाद में डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार के फैसले को खारिज कर दिया. अंततः सुप्रीम कोर्ट ने भी हाइकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अब तक आरजी कर मेडिकल कॉलेज में पोस्टिंग नहीं दी गयी. डॉ अनिकेत ने कहा कि आरजी कर मामले में इंसाफ की मांग को लेकर उनकी लड़ाई जारी रहेगी और उन्होंने सभी से पहले की तरह समर्थन बनाए रखने की अपील की.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
