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पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक 72 वर्षीय रिटायर्ड सीआईएसएफ अधिकारी को डिजिटल अरेस्ट कर जालसाजों ने 16 लाख रुपए ठग लिये. पीड़ित वृद्ध गंभीर रूप से बीमार पत्नी के साथ अकेले रहते हैं. उनका आरोप है कि ठगों ने खुद को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का अधिकारी बताकर उनसे करीब 16 लाख रुपए अपने खाते में ट्रांसफर करवा लिये. आनंदपुर थाने में उन्होंने इसकी लिखित शिकायत दर्ज करायी है.
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित ने बताया कि बायपास सर्जरी के अलावा गॉल ब्लाडर, रेक्टम ट्यूमर, घुटने के जोड़ और आंखों से संबंधित कई गंभीर सर्जरी हो चुकी है. पत्नी भी गंभीर रूप से बीमार हैं. पीड़ित को पेंशन मिलती है और जीवन भर की कमाई बैंक अकाउंट में जमा थी. पीड़ित को 23 जनवरी से 1 फरवरी 2026 के बीच 2 मोबाइल नंबरों से लगातार कॉल आये. कॉल करने वालों ने खुद को सीबीआई मुंबई का अधिकारी बताया. उन्होंने दावा किया कि उनका (सीआईएसएफ अधिकारी का) नाम एक बड़े मनी लाउंडरिंग केस में सामने आया है. इस केस में एक एयरलाइंस कंपनी से जुड़े व्यक्ति की गिरफ्तारी हुई है.
ठगों ने कई फर्जी दस्तावेज भी भेजे
आरोप है कि ठगों ने पीड़ित सीआईएसएफ अधिकारी को कथित एफआईआर की कॉपी, एटीएम कार्ड की जब्ती और ईडी की कार्रवाई से संबंधित दस्तावेज भी भेजे. पीड़ित को धमकाया कि यदि उन्होंने किसी को इसकी सूचना दी, तो उन्हें तत्काल गिरफ्तार कर लिया जायेगा. ठगों ने उन्हें 26 जनवरी 2026 तक एक हलफनामा (एफिडेविट) भेजने और लगातार सर्विलांस रिपोर्ट के नाम पर संपर्क में रहने को कहा.
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28 से 31 जनवरी के बीच वसूले रुपए
पीड़ित का आरोप है कि 28 और 31 जनवरी 2026 को ठगों ने सुप्रीम कोर्ट और वित्त मंत्रालय का हवाला देते हुए उन्हें क्रमशः 9 लाख और 7 लाख रुपए जमा करने के लिए मजबूर किया. आश्वासन दिया कि पुलिस क्लियरेंस मिलने के बाद 48 से 72 घंटे के अंदर यह राशि वापस कर दी जायेगी.
मानसिक दबाव में ट्रांसफर किये 16 लाख रुपए
मानसिक दबाव और पत्नी की हालत को देखते हुए पीड़ित ने अपनी पूरी जमा पूंजी 16 लाख रुपए संबंधित खातों में ट्रांसफर कर दी. इसके बाद उन्होंने रुपए लौटाने की बजाय और रुपए की मांग की. तब उन्हें ठगी का अहसास हुआ. उन्होंने स्थानीय थाने में इसकी शिकायत दर्ज करायी. पुलिस ने शिकायत दर्ज कर पूरे गिरोह तक पहुंचने की कोशिश शुरू कर दी है.
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