रैंकिंग सुधार पर सीयू सक्रिय संकाय लायें तेजी : कुलपति

कलकत्ता यूनिवर्सिटी (सीयू) के कुलपति आशुतोष घोष ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित वार्षिक रैंकिंग प्रक्रिया में विश्वविद्यालय की स्थिति सुधारने के लिए संकाय सदस्यों को सक्रिय रूप से कार्य करने का निर्देश दिया है.

संवाददाता, कोलकाता

कलकत्ता यूनिवर्सिटी (सीयू) के कुलपति आशुतोष घोष ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित वार्षिक रैंकिंग प्रक्रिया में विश्वविद्यालय की स्थिति सुधारने के लिए संकाय सदस्यों को सक्रिय रूप से कार्य करने का निर्देश दिया है. वाइस चांसलर ने फैकल्टी सदस्यों के साथ विशेष बैठक कर विश्वविद्यालय की गिरती रैंकिंग पर चिंता जतायी.

बैठक में कुलपति घोष ने शिक्षकों से रैंकिंग में गिरावट के संभावित कारणों का विश्लेषण करने और सुधार के उपाय सुझाने को कहा. उन्होंने कहा : हमें कारणों को समझ कर अपने अकादमिक और प्रशासनिक मानकों को बेहतर बनाना होगा. संकाय सदस्यों से पेटेंट की संख्या बढ़ाने और विश्वविद्यालय के आउटरीच कार्यक्रमों से जुड़े डेटा को समय पर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान देने को कहा गया.

वीसी ने बताया कि रैंकिंग में गिरावट चिंता का विषय है. यदि समय रहते सुधार नहीं किये गये, तो विश्वविद्यालय को एजेंसियों और प्रतिभाशाली छात्रों से फंडिंग जुटाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है.

गौरतलब है कि राष्ट्रीय संस्थान रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआइआरएफ) में कलकत्ता विश्वविद्यालय की स्थिति पिछले दो वर्षों में काफी नीचे आयी है. राज्य विश्वविद्यालयों की श्रेणी में सीयू 2024 के चौथे स्थान से गिर कर इस वर्ष 15वें स्थान पर पहुंच गया है. वहीं, समग्र विश्वविद्यालय श्रेणी में यह 18वें स्थान से फिसल कर 39वें स्थान पर आ गया है.

कलकत्ता यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन के सचिव सनातन चट्टोपाध्याय ने बताया कि कुलपति ने रैंकिंग सुधार को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए शिक्षकों से सामूहिक रूप से प्रयास करने का आग्रह किया है. उन्होंने कहा कि शोध प्रकाशनों और पेटेंट से जुड़े आंकड़े पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं कराये जा रहे हैं, जबकि मंत्रालय इन पहलुओं को रैंकिंग में विशेष महत्व देता है.

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय में शिक्षकों की उपलब्धियों को दर्ज करने के लिए एक केंद्रीकृत डेटा संग्रह प्रणाली का अभाव है, जिसके कारण बार-बार डेटा मांगने से संकाय सदस्यों में असंतोष बढ़ सकता है. खराब शिक्षक-छात्र अनुपात भी एक बड़ा कारण है. जुलाई में बताया गया था कि सीयू में 835 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 396 शिक्षक कार्यरत हैं, यानी 52 प्रतिशत पद रिक्त हैं.

कुलपति घोष ने कहा कि वे रिक्त पदों को जल्द से जल्द भरने के इच्छुक हैं. इस मुद्दे पर आगामी सप्ताह होने वाली सिंडिकेट बैठक में चर्चा की जायेगी.

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Published by: Akhilesh kumar singh

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