शहर की ड्रेनेज व्यवस्था को अपडेट करना चाहता है निगम

निगम का मानना है कि यदि वह अपने जल निकासी व्यवस्था का उचित प्रबंधन कर लेते हैं तो मॉनसून के दिनों में जलजमाव की प्रवृत्ति 95 फीसदी कम हो सकती है.

कोलकाता की जल निकासी व्यवस्था को और अधिक बेहतर बनाने पर भी हुई चर्चा

कोलकाता. महानगर में बारिश के बाद जलजमाव ना हो, इसके लिए अब कोलकाता नगर निगम अपने ड्रेनेज सिस्टम को अपडेट करना चाहता है. निगम का मानना है कि यदि वह अपने जल निकासी व्यवस्था का उचित प्रबंधन कर लेते हैं तो मॉनसून के दिनों में जलजमाव की प्रवृत्ति 95 फीसदी कम हो सकती है. ऐसे में गुरुवार को कोलकाता नगर निगम में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई. कोलकाता में जलजमाव से मुक्ति पर चर्चा हुई. यह जानकारी निगम के सीवरेज व ड्रेनेज विभाग के मेयर परिषद के सदस्य तारक सिंह ने दी.

निगम में हुई बैठक के बाद उन्होंने पत्रकारों को बताया कि सिंचाई विभाग के अंतर्गत आने वाले चोरियालखाल, बागजोला खाल, घुसीघाटा, मोनीखाली, शूटीखाल जंक्शन प्वाइंट और गुनियागाछी खाल पर आवश्यकतानुसार लिफ्टिंग स्टेशन और लॉक गेट का निर्माण लिया गया है. क्योंकि नदी में ज्वार के दौरान लॉक गेट बंद रहने की स्थिति में भी जल निकासी हो सके. श्री सिंह ने बताया कि बैठक में कोलकाता के दही घाट, आदि गंगा और बोट कैनल के जंक्शन पर लिफ्टिंग स्टेशन निर्माण का निर्णय लिया गया है. उन्होंने बताया कि आदिगंगा और विद्याधरी नदियों की जल निकासी व्यवस्था से जुड़े लॉक गेटों को एक लिफ्टिंग स्टेशन से जोड़े जाने की जरूरत है, ताकि लॉक गेट के बंद होने पर भी पानी निकासी नदी में किया जा सके. उन्होंने बताया कि हुगली नदी और आदि गंगा के किनारे 27 लॉक गेट हैं और छह स्थानों पर लिफ्टिंग स्टेशन हैं. इनमें से 21 लॉक गेटों को लिफ्टिंग स्टेशनों की भी आवश्यकता है. क्या हमारे पास जो बुनियादी ढांचा है, वह 40 मिमी प्रति घंटे की रफ्तार से बारिश के पानी की निकासी करने में सक्षम है? अगर नहीं तो उचित उपाय किये जायें. पंपिंग स्टेशनों की क्षमता कितनी है?

हमें यह देखना होगा कि क्या यह हमारे मौजूदा बुनियादी ढांचे के अनुकूल है, अगर नहीं, तो उचित कदम उठाया जाना चाहिए.

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Author: GANESH MAHTO

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