पत्नी हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहा दोषी बरी

पत्नी की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक व्यक्ति को कोलकाता हाइकोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में बरी करने का निर्देश दिया है.

संवाददाता, कोलकाता

पत्नी की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक व्यक्ति को कोलकाता हाइकोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में बरी करने का निर्देश दिया है. आरोपी प्रणव कुमार शासमल जल्द ही जेल से रिहा होगा.

यह मामला वर्ष 2001 का है. पूर्व मेदिनीपुर जिले के पटाशपुर थाना क्षेत्र के निवासी प्रणव कुमार शासमल पर पत्नी की गला घोंटकर हत्या करने का आरोप लगाया गया था. जुलाई 2001 के अंत में मृतका के पिता मनोरंजन घड़ाई को बेटी की मौत की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने संबंधित थाने में एफआइआर दर्ज करायी. पुलिस ने इसके आधार पर प्रणव को गिरफ्तार किया था. लंबी सुनवाई के बाद वर्ष 2010 में कांथी की ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनायी थी.

इसके साथ ही उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था. ट्रायल कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए प्रणव ने कोलकाता हाइकोर्ट में अपील दायर की. हाइकोर्ट में सुनवाई के दौरान गवाहों के बयानों में गंभीर विरोधाभास सामने आये. परिवार के किसी भी सदस्य ने आरोपी के खिलाफ ठोस और निर्णायक गवाही नहीं दी. इसके अलावा पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भी सवाल उठे. मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा और न्यायमूर्ति अजय गुप्ता की डिविजन बेंच ने यह सवाल उठाया कि केवल 30 घंटे में शव इतनी अधिक अवस्था में सड़ कैसे गया? इस प्रश्न का कोई संतोषजनक उत्तर प्रस्तुत नहीं किया जा सका. अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने से पहले घटनाक्रम का स्पष्ट होना आवश्यक है, जबकि इस मामले में न तो हत्या का कारण स्पष्ट हो सका और न ही हत्या का आरोप प्रमाणित हो पाया. इन परिस्थितियों में अदालत ने सजायाफ्ता को बरी करने का निर्देश दिया.

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By AKHILESH KUMAR SINGH

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