संवाददाता, कोलकाता
हाल के दिनों में विभिन्न भाजपा नेताओं और मंत्रियों पर बंगाल के मनीषियों का अनादर करने का आरोप लगाया गया है. तृणमूल पार्षद अरूप चक्रवर्ती ने बुधवार को कोलकाता नगर निगम (केएमसी) की मासिक बैठक में भाजपा नेताओं और मंत्रियों के बयानों की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पेश किया.
इस प्रस्ताव पर जोरदार बहस के साथ बैठक का माहौल गरमा गया. इस प्रस्ताव के बारे में पार्षद अरूप चक्रवर्ती ने कहा : मैं पुरश्री के अगले अंक में स्वतंत्रता संग्राम में मनीषियों की क्या भूमिका थी और देशद्रोहियों की क्या भूमिका थी, इसे प्रकाशित करने की अपील कर रहा हूं. पुरश्री का यह अंक विशेषज्ञों से तैयार किया जाना चाहिए.
इस संदर्भ में भाजपा पार्षद सजल घोष ने प्रस्ताव का आंशिक समर्थन किया और कहा कि राममोहन राय को ब्रिटिश एजेंट कहने वाले व्यक्ति ने भी माफी मांगी है. 2019 में विद्यासागर की मूर्ति तोड़ी गयी थी. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि उस मामले में अभी तक आरोप पत्र क्यों नहीं दायर किया गया है. विद्यासागर की मूर्ति तोड़ने वाले भी उतने ही पापी हैं, जितने वे लोग जिन्होंने इस मामले की सुनवाई प्रक्रिया में प्रगति नहीं की. इस संदर्भ में देवाशीष कुमार ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में बेईमानी और दलाली करने वालों को दिये गये पुरस्कारों की संख्या प्रकाशित की जानी चाहिए. इस संदर्भ में मेयर फिरहाद हकीम ने कहा कि कोलकाता नगर निगम में द ग्रेट कलकत्ता गजट को फिर से शुरू किया गया है.
बंगाली मनीषियों का अपमान होने पर कोलकाता में पहले भी विरोध प्रदर्शन हुए हैं, और यहां फिर से विरोध प्रदर्शन होंगे. भाजपा लोगों को बांटने की राजनीति कर रही है. भाजपा बांग्ला विरोधी पार्टी है. केंद्र सरकार ने 100 दिन की परियोजना के बकाया सहित बंगाल का समस्त बकाया रोक दिया है.
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