केंद्र सरकार पर सीमावर्ती क्षेत्रों की उपेक्षा करने का लगाया आरोप

तृणमूल नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने गोलाबारी से प्रभावित जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले का किया दौरा

तृणमूल नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने गोलाबारी से प्रभावित जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले का किया दौरा

कोलकाता/राजौरी. तृणमूल कांग्रेस के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को सीमा पार से गोलाबारी से प्रभावित जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले का दौरा किया और केंद्र सरकार पर सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया. प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि वे पाकिस्तानी गोलाबारी से उत्पन्न मानवीय त्रासदी को देखने के बाद ‘टूटे हुए दिलों’ के साथ लौट रहे हैं. उन्होंने वहां के लोगों के साथ एकजुटता प्रकट की. पहलगाम आतंकवादी हमले के जवाब में छह मई की देर रात को भारत द्वारा पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किये जाने के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया था और करीब दो सप्ताह पहले भारी गोलाबारी हुई थी. भारत द्वारा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत की गयी कार्रवाई के जवाब में पाकिस्तान की ओर से आठ से 10 मई के बीच जम्मू क्षेत्र में तोप, मिसाइल और ड्रोन के जरिये किये गये हमलों में 27 लोगों की मौत हो गयी, जबकि 70 से अधिक लोग घायल हो गये. तृणमूल के नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल ने जम्मू-कश्मीर का तीन दिवसीय दौरा किया, जो शुक्रवार को समाप्त हुआ. प्रतिनिधिमंडल में तृणमूल के सांसद डेरेक ओ ब्रायन, सागरिका घोष, मोहम्मद नदीमुल हक, पश्चिम बंगाल के मंत्री डॉ मानस भुइयां और पूर्व सांसद ममता बाला ठाकुर शामिल हैं. इस दिन प्रतिनिधिमंडल ने राजौरी के सरकारी मेडिकल कॉलेज का भी दौरा किया, जहां उन्होंने घायलों से मुलाकात की. इस दौरान उन्हें घायलों के इलाज के लिए उठाये गये कदमों के बारे में जानकारी दी गयी.

राज्यसभा सदस्य सागरिका घोष ने कहा, ‘‘हम जम्मू-कश्मीर में पीड़ितों को यह भरोसा देने आये हैं कि पश्चिम बंगाल और पूरे भारत की जनता आपके साथ खड़ी है. हम पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ यहां आये और दो दिनों दौरा करने के बाद तीसरे दिन राजौरी पहुंचे. गत गुरुवार को हम पुंछ में थे. प्रतिनिधिमंडल के सदस्य हाल की घटनाओं की मानवीय कीमत को प्रत्यक्ष रूप से देखने के लिए अस्पताल गये थे. सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोग सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं और दुख की बात है कि उन्हें सबसे ज्यादा नजरअंदाज किया गया है. हमने इम्तियाज अहमद से मुलाकात की, जिन्हें अपनी हाथ गंवानी पड़ी है. वह अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे और अब काम करने की हालत में नहीं हैं. उनके तीन बच्चे हैं और परिवार पूरी तरह असहाय हो गया है.’’

उन्होंने आगे यह भी कहा, ‘‘हमने 12 वर्षीय रुखसाना से भी मुलाकात की, जिसका पैर बुरी तरह जख्मी हुआ है. वह अब दौड़ नहीं सकती है और न ही स्कूल जा सकती है. यह दिल तोड़ देने वाली मानवीय त्रासदी है, जो राजौरी और पुंछ के सीमावर्ती इलाकों में सामने आ रही है.’’ घोष ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सीमावर्ती समुदायों की उपेक्षा की जा रही है. साथ ही सवाल किया, ‘‘इन्हें बेहतर सुरक्षा क्यों नहीं मिली? ये निर्दोष लोग अग्रिम मोर्चे पर हैं और सीमा पार से होने वाली गोलाबारी के खिलाफ पूरी तरह असहाय हैं. इन्हें इतनी गंभीर चोटें क्यों सहनी पड़ रही हैं? हम टूटे दिलों के साथ लौट रहे हैं. इस क्षेत्र के लोगों की पीड़ा देखकर हम बेहद दुखी हैं.’’

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और पूर्व विधायक एजाज जान ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी का आभार जताया कि उन्होंने पाकिस्तान से हो रही गोलाबारी से पैदा हुई मानवीय त्रासदी को देखने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल जम्मू-कश्मीर भेजा. उन्होंने कहा, ‘‘हम टीम के सदस्यों का धन्यवाद करते हैं कि वे राजौरी और पुंछ आये, पीड़ितों और घायलों के परिजन से मिले और उनके साथ एकजुटता प्रकट की.’’

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Author: SANDIP TIWARI

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