पश्चिम बंगाल के प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों व शिक्षाकर्मियों के ‘सरप्लस’ तबादले पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने फिलहाल अंतरिम रोक लगा दी है. बुधवार को न्यायमूर्ति विभाष पटनायक ने निर्देश दिया कि राज्य सरकार अगली सुनवाई तक किसी भी शिक्षक या शिक्षाकर्मी का सरप्लस के आधार पर तबादला नहीं करेगी. हालांकि, सरकार नयी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत आंतरिक प्रशासनिक प्रक्रिया जारी रख सकती है. इच्छुक शिक्षकों से आवेदन भी ले सकती है. मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह बुधवार (12 अगस्त) को होगी.
नयी एसओपी को दी गयी चुनौती
राज्य सरकार ने हाल ही में सरप्लस तबादले के लिए 15 जुलाई और 24 जुलाई को 2 नयी एसओपी जारी की थी. इसके तहत पहले स्वेच्छा से स्थानांतरण चाहने वाले शिक्षकों से आवेदन मांगे गये थे. सरकार ने यह भी संकेत दिया था कि आवश्यकता पड़ने पर बाद में अन्य शिक्षकों के तबादले पर भी निर्णय लिया जायेगा. इन दोनों एसओपी को चुनौती देते हुए कुछ शिक्षकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया.
याचिकाकर्ताओं की दलील
- सरप्लस तबादले में प्राथमिकता तय करने के मानदंड स्पष्ट नहीं हैं.
- यह नहीं बताया गया है कि प्राथमिकता अधिक आयु वाले शिक्षकों को मिलेगी या अधिक सेवा अवधि वाले शिक्षकों को. इसलिए पूरी प्रक्रिया में भ्रम की स्थिति है.
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प्रशासनिक प्रक्रिया जारी रहेगी
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एसओपी के आधार पर फिलहाल किसी भी शिक्षक या शिक्षाकर्मी का तबादला नहीं किया जायेगा. हालांकि, सरकार आवश्यक सूचनाएं एकत्र करने और अन्य प्रशासनिक तैयारियां जारी रख सकती है. यानी आवेदन लेने और प्रक्रिया संबंधी कार्यों पर रोक नहीं होगी, लेकिन तबादले के आदेश जारी नहीं किये जा सकेंगे.
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सरकार क्यों लायी सरप्लस ट्रांसफर पॉलिसी?
वर्ष 2009 के शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के अनुसार प्रत्येक 30 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक का अनुपात आदर्श माना गया है. राज्य के कई प्राथमिक विद्यालयों में यह संतुलन नहीं है. कुछ स्कूलों में विद्यार्थियों की तुलना में शिक्षकों की संख्या अधिक है, जबकि कई विद्यालयों में छात्रों की संख्या अधिक होने के बावजूद शिक्षकों की कमी है. इसी असंतुलन को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने सरप्लस तबादला नीति लागू करने का निर्णय लिया था.
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