बंगाल के सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में होगा बंपर इनक्रीमेंट, सेवेंथ पे कमीशन का मिलेगा लाभ

विधानसभा चुनाव 2026 में जाने से पहले पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए खुशियों की बारिश कर दी है. एक दिन में सरकारी कर्मचारियों को तीन-तीन खुशखबरी मिली. वित्त मंत्री ने 4 प्रतिशत डीए बढ़ाने और सातवें वेतन आयोग के गठन का ऐलान किया. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि वह 2008 से 2019 तक का बकाया डीए भुगतान कर्मचारियों को करे.

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पेश किये गये अंतरिम बजट में तृणमूल कांग्रेस सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए कई बड़ी और महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं. गुरुवार को विधानसभा में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) चंद्रिमा भट्टाचार्य ने राज्य में सातवें वेतन आयोग के गठन की घोषणा की.

बंगाल में 22 प्रतिशत हो जायेगा महंगाई भत्ता

चंद्रिमा भट्टाचार्य ने राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता (डीए) में 4 प्रतिशत की वृद्धि का भी ऐलान किया है. इसके बाद कर्मचारियों का डीए 18 प्रतिशत से बढ़कर 22 प्रतिशत हो जायेगा. यह बढ़ा हुआ डीए एक अप्रैल से लागू होगा. राज्य सरकार के कर्मचारी लंबे समय से सातवें वेतन आयोग के गठन की मांग कर रहे थे. कर्मचारी संगठन मूल वेतन, ग्रेड पे और विभिन्न भत्तों में वृद्धि की भी मांग कर रहे थे.

  • डीए 4 प्रतिशत बढ़ा, एक अप्रैल से लागू होगा बढ़ा महंगाई भत्ता
  • अंतरिम बजट में वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने की बड़ी घोषणा

अभी भी कर्मचारियों को मिलता है पांचवें वेतन आयोग का डीए

पश्चिम बंगाल में छठे वेतन आयोग का गठन 27 नवंबर 2015 को किया गया था, जिसकी अवधि 31 दिसंबर 2015 को समाप्त हो गयी थी. इस आयोग के अध्यक्ष प्रसिद्ध अर्थशास्त्री अभिरूप सरकार थे. आयोग ने वर्ष 2019 में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी. वहीं, पिछले वर्ष जून में हाइकोर्ट के निर्देश पर छठवें वेतन आयोग की पूर्ण रिपोर्ट जारी की गयी. वर्ष 2009 से 2019 के बीच का लंबित महंगाई भत्ता अभी भी पांचवें वेतन आयोग के अंतर्गत आता है.

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पेंशनभोगियों के लिए कैशलेस इलाज की सीमा बढ़ी

अंतरिम बजट में ममता बनर्जी सरकार ने अवकाशप्राप्त कर्मचारियों (पेंशनभोगियों) को भी राहत देने की घोषणा की है. वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंतरिम बजट में राज्य सरकार ने पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य परियोजना के तहत कर्मचारियों के स्वास्थ्य खाते में आवंटन बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है. स्वास्थ्य परियोजना में पेंशनभोगियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा की सीमा भी बढ़ा दी गयी है. वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने बताया कि यदि किसी पेंशनभोगी कर्मचारी के इलाज का खर्च 2 लाख रुपए से अधिक हो जाता है, तो अतिरिक्त खर्च का 75 प्रतिशत तक कैशलेस भुगतान पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य परियोजना के तहत किया जायेगा.

पहले सिर्फ 2 लाख तक कैशलेस इलाज की थी सुविधा

पहले इस योजना में केवल दो लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध थी. यह सुविधा राज्य सरकार के पैनल में शामिल सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज कराने पर ही मिलेगी. इस संबंध में जल्द विस्तृत विज्ञप्ति जारी की जायेगी. बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि समय के साथ इलाज का खर्च लगातार बढ़ रहा है. पेंशनभोगियों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को कम करने के उद्देश्य से कैशलेस इलाज की सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया गया है.

कर्मचारियों, उनके परिजनों और पेंशनभोगियों को मिलती हैं सुविधाएं

राज्य सरकार के कर्मचारियों, उनके परिवार के सदस्यों और पेंशनभोगियों को पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य परियोजना के तहत इलाज की सुविधा मिलती है. राज्य के विभिन्न सरकारी और निजी अस्पतालों के साथ-साथ राज्य के बाहर स्थित लगभग 11 अस्पताल भी इस परियोजना के पैनल में शामिल हैं.

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पश्चिम बंगाल का बजट : सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 4 प्रतिशत बढ़ाने का ऐलान

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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