कीमतों में उछाल से जूट मार्केट में हड़कंप

जूट मार्केट में संकट गहराता जा रहा है, क्योंकि कीमतें 6,825 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गयीं हैं. इसका प्रमुख कारण सट्टेबाजी और 2025-26 सीजन में नयी फसल के देर से आने की आशंका बतायी जा रही है. एक्सपर्ट कमेटी ऑन जूट (ईसीजे) की बैठक में दी गयी जानकारी के अनुसार, 2024-25 सीजन के अंत में 31.50 लाख बेल्स का भारी कैरीओवर स्टॉक होगा. फिर भी, व्यापारी बाजार की धारणा का फायदा उठाकर कृत्रिम कमी पैदा कर रहे हैं, जिससे कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (5,335 रुपये) से कहीं ऊपर चली गयीं हैं.

कोलकाता.

जूट मार्केट में संकट गहराता जा रहा है, क्योंकि कीमतें 6,825 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गयीं हैं. इसका प्रमुख कारण सट्टेबाजी और 2025-26 सीजन में नयी फसल के देर से आने की आशंका बतायी जा रही है. एक्सपर्ट कमेटी ऑन जूट (ईसीजे) की बैठक में दी गयी जानकारी के अनुसार, 2024-25 सीजन के अंत में 31.50 लाख बेल्स का भारी कैरीओवर स्टॉक होगा. फिर भी, व्यापारी बाजार की धारणा का फायदा उठाकर कृत्रिम कमी पैदा कर रहे हैं, जिससे कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (5,335 रुपये) से कहीं ऊपर चली गयीं हैं.

जूट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (जेसीआई) और हालिया जेसीआइएस रिपोर्ट ने कम फसल के दावों को खारिज किया है, जिसमें 2024-25 की पैदावार 76.73 लाख बेल्स अनुमानित है, जो मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है. लेकिन 2025-26 की नयी फसल में देरी की आशंका से सट्टेबाजी बढ़ी है, जो 2021-22 से चली आ रही है, जब अधिशेष के बावजूद कीमतें 7,200 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गयीं थीं.

जूट कमिश्नर ऑफिस (जेसीओ) ने मंगलवार को सट्टेबाजी रोकने के लिए स्टॉक कंट्रोल ऑर्डर जारी किया, जिसमें बेलर्स के लिए 1,500 क्विंटल और अन्य व्यापारियों के लिए 300 क्विंटल की सीमा तय की गयी है, साथ ही 31 मई 2025 तक अनुपालन की समय सीमा दी गयी है.

मंगलवार को जूट आयुक्त कार्यालय ने नया स्टॉक नियंत्रण आदेश जारी किया. अब मिलों, व्यापारी एजेंसियों और बेलर्स को रोजाना स्टॉक, खरीद-बिक्री और डिस्पैच की रिपोर्ट देनी होगी. हालांकि, यह कदम सीजन के अंत में देर से उठाया गया है, जब मात्र 40 दिन बचे हैं. आलोचकों का कहना है कि जेसीओ की देरी ने सट्टेबाजी को बढ़ावा दिया, जिससे कीमतों में अस्थिरता आयी है.

नयी फसल में देरी से आपूर्ति में हो सकती है अस्थायी कमी :

उच्च कैरीओवर स्टॉक और नयी फसल में देरी से 2025-26 के शुरुआती महीनों (जुलाई-अगस्त) में आपूर्ति में अस्थायी कमी हो सकती है, जिससे कीमतें ऊंची रह सकती हैं. यदि जेसीओ का ऑर्डर प्रभावी ढंग से लागू हुआ, तो सट्टेबाजी से जमा स्टॉक निकल सकता है, जिससे कीमतें कम हो सकती हैं. लेकिन 2025-26 के लिए 31.50 लाख बेल्स का भारी ओपनिंग स्टॉक और कमजोर मांग को देखते हुए, नयी फसल आने पर कीमतों में गिरावट संभावित है. जूट सेक्टर में सट्टेबाजी और धीमी नियामक कार्रवाई की वजह से अस्थिरता बनी हुई है, जिससे किसान और व्यापारी अनिश्चितता के चक्र में फंसे हैं.

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Published by: Bijay kumar

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