बांग्ला साहित्यकार शंकर नहीं रहे, ममता बनर्जी ने कहा- टूट गया बांग्ला साहित्य का चमकता सितारा

Shankar Mukhopadhyay Dead: बांग्ला साहित्य के सबसे लोकप्रिय लेखकों में एक शंकर मुखोपाध्याय उर्फ शंकर नहीं रहे. 93 साल की उम्र में शंकर ने राजधानी कोलकाता के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली. उनके परिजनों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी.

Shankar Mukhopadhyay Dead: ‘शंकर’ के नाम से मशहूर बांग्ला लेखक मणि शंकर मुखोपाध्याय (93) का शुक्रवार को दोपहर में यहां एक अस्पताल में निधन हो गया. उनके परिजनों ने यह जानकारी दी. परिजनों ने बताया कि शंकर मुखोपाध्याय उर्फ शंकर कुछ समय से अस्वस्थ थे. उनके परिवार में 2 बेटियां हैं.

‘चौरंगी’ उपन्यास में शहरी जीवन और समाज की जटिलता को किया उजागर

शंकर मुखोपाध्याय के ‘चौरंगी’ जैसे उपन्यासों ने शहरी जीवन और समाज की जटिलताओं को बखूबी उजागर किया. वह बांग्ला साहित्य के सबसे लोकप्रिय लेखकों में से एक माने जाते थे.

Shankar Mukhopadhyay Dead: ममता बनर्जी ने शंकर के निधन पर शोक जताया

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने शंकर मुखोपाध्याय के निधन पर शोक व्यक्त किया है. ममता बनर्जी ने अपने शोक संदेश में उन्हें एक ऐसी महान साहित्यिक हस्ती बताया, जिनकी रचनाएं पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी.

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टूट गया बांग्ला साहित्य का चमकता सितारा

ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा- प्रसिद्ध बांग्ला लेखक मणिशंकर मुखोपाध्याय (शंकर) के निधन से मुझे गहरा दुख हुआ है. उनके निधन से बांग्ला साहित्य जगत का एक चमकता सितारा टूट गया.

विवेकानंद पर गहन शोध और पुस्तकें अमूल संसाधन

ममता बनर्जी लिखती हैं कि ‘चौरंगी’ से लेकर ‘काट अख्यानारे, ‘सीमाबाद’ से ‘जनारण्य’ तक, उनकी कालजयी रचनाओं ने बांग्ला पाठकों की पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध किया है. उनकी रचनाओं में आम लोगों के जीवन संघर्ष की अनकही कहानियां सामने आयीं. विशेषकर स्वामी विवेकानंद पर उनका गहन शोध और पुस्तकें हमारे लिए अमूल्य संसाधन हैं.

सांस्कृतिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति

बंगाल की चीफ मिनिस्टर ममता बनर्जी ने लिखा कि उनका (शंकर का) निधन हमारे सांस्कृतिक जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है. मैं उनके शोक संतप्त परिवार और अनगिनत शुभचिंतकों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूं.

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By Mithilesh Jha

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