बंगाली नागरिकों को किया जा रहा परेशान : वृंदा करात

वृंदा करात और अनुराग सक्सेना ने शुक्रवार को गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर कहा कि उन्हें ‘अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की पहचान’ के लिए चल रही प्रक्रिया के दौरान बांग्ला बोलने के आधार पर वास्तविक नागरिकों को परेशान किये जाने की कई शिकायतें मिली

माकपा नेताओं ने गृहमंत्री अमित शाह को लिखा पत्र

संवाददाता, कोलकाता.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की नेता वृंदा करात और अनुराग सक्सेना ने शुक्रवार को गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर कहा कि उन्हें ‘अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की पहचान’ के लिए चल रही प्रक्रिया के दौरान बांग्ला बोलने के आधार पर वास्तविक नागरिकों को परेशान किये जाने की कई शिकायतें मिली हैं. पूर्व सांसद और माकपा पोलित ब्यूरो की विशेष आमंत्रित सदस्य करात और पार्टी के दिल्ली प्रदेश सचिव सक्सेना ने कहा कि उन्होंने एक टीम के साथ दिल्ली की बवाना जेजे कॉलोनी का दौरा किया और कई शिकायतकर्ताओं से मुलाकात की. माकपा नेताओं ने आरोप लगाया, ‘हम न्यूनतम मानवाधिकारों के खुलेआम उल्लंघन, उत्पीड़न और कुछ मामलों में जबरन वसूली के स्तर तक भ्रष्टाचार देखकर स्तब्ध रह गये.’ उन्होंने बताया कि यह काम केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के तहत दिल्ली पुलिस और कई अन्य एजेंसियों द्वारा किया जा रहा है. मामलों की सूची देते हुए, उन्होंने मोहम्मद निज़ामुद्दीन नाम के एक व्यक्ति का उदाहरण दिया, जिसने बताया कि वह झारखंड के गोड्डा जिले का रहने वाला है और कई दशक पहले दिल्ली आकर बस गया था.

माकपा नेताओं ने कहा, ‘उसे 2004 में डीडीए द्वारा बवाना जेजे कॉलोनी में एक भूखंड आवंटित किया गया था और वर्तमान में वह वहीं रहता है. पांच जुलाई को स्थानीय थाने से पुलिसकर्मियों की एक टीम उसके घर गयी और उस पर एक बांग्लादेशी को अवैध कागजात हासिल करने में मदद करने का आरोप लगाया.’ माकपा नेताओं ने कहा, ‘उसने पुलिस को बताया कि तीन साल पहले एक किरायेदार उसके यहां रह रहा था और उसका उससे कोई संपर्क नहीं है और न ही उसे उस व्यक्ति के ठिकाने के बारे में कोई जानकारी है.’ करात एवं सक्सेना ने दावा किया कि छह जुलाई को निज़ामुद्दीन को फिर से थाने ले जाया गया और कथित तौर पर उसकी पिटाई भी की गयी. हालांकि बाद में उसे रिहा कर दिया गया, लेकिन उसके परिवार की तस्वीरें पुलिस की वेबसाइट पर अपलोड कर दी गयी हैं. दोनों नेताओं ने कुछ और उदाहरण दिये. उन्होंने सवाल किया, ‘भारत की राजधानी दिल्ली में बांग्लादेश से आये अवैध प्रवासियों की पहचान की प्रक्रिया न्यूनतम मानवाधिकारों के उल्लंघन का एक उदाहरण है. इस प्रक्रिया में, वास्तविक भारतीय नागरिकों को भाषा और धर्म के आधार पर निशाना बनाया जा रहा है. क्या अब भारत में बांग्ला बोलना अपराध है?’’

उन्होंने कहा, ‘इसके अलावा, क्या भारत के सभी बांग्ला भाषी मुस्लिम नागरिकों को अपराधी और अवैध प्रवासी माना जायेगा? हम आपको याद दिलाना चाहेंगे कि पश्चिम बंगाल की 26 प्रतिशत आबादी बांग्ला भाषी मुसलमानों की है.’

माकपा नेताओं ने यह भी कहा कि अवैध प्रवासियों के निर्वासन के लिए अंतरराष्ट्रीय मानदंड हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘दिल्ली में पहचान के मौजूदा तरीके इन सभी मानदंडों का उल्लंघन करते हैं.’

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