कोलकाता से शिव कुमार राउत
Bengal School : पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों की प्रबंधन समितियों को भंग कर प्रशासकों की नियुक्ति किये जाने का असर अब पार्ट-टाइम शिक्षकों पर पड़ने लगा है. राज्य के कई स्कूलों में प्रशासक वेतन संबंधी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने से हिचकिचा रहे हैं. ऐसे में 1 जुलाई से इन शिक्षकों का वेतन रुकने की आशंका गहरा गयी है
स्कूलों में शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित
जानकारी के अनुसार, पार्ट-टाइम शिक्षकों की नियुक्ति पूर्व में प्रबंधन समितियों के माध्यम से हुई थी. इसी वजह से कुछ प्रशासक नियुक्ति प्रक्रिया की जिम्मेदारी लेने और वेतन स्वीकृति के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने से बच रहे हैं. इससे राज्य के अनेक स्कूलों में शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है.
कई स्कूलों में एक भी स्थायी शिक्षक नहीं
हुगली के एक उच्च विद्यालय में हायर सेकेंडरी कॉमर्स स्ट्रीम में लगभग 200 छात्र हैं, लेकिन वहां एक भी स्थायी शिक्षक नहीं है. पूरे विभाग की पढ़ाई पार्ट-टाइम शिक्षकों के भरोसे चल रही है. इसी तरह की स्थिति कोलकाता, दक्षिण 24 परगना, नदिया, हावड़ा तथा पूर्व और पश्चिम मेदिनीपुर समेत कई जिलों के स्कूलों में भी देखने को मिल रही है.
चार हजार मानदेय पर काम करते हैं शिक्षक
शिक्षक संगठनों का कहना है कि अंशकालिक शिक्षकों को मात्र दो से चार हजार रुपये मासिक मानदेय मिलता है, लेकिन वे स्थायी शिक्षकों के समान ही पढ़ाने और अन्य शैक्षणिक जिम्मेदारियां निभाते हैं. यदि उनका वेतन बंद हुआ तो आर्थिक मजबूरी के कारण कई शिक्षक काम छोड़ने को विवश हो सकते हैं, जिससे स्कूलों में पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित होगी.
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शिक्षकों को तत्काल हुआ आंशिक भुगतान
स्कूल शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार किसी भी कीमत पर स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियां बाधित नहीं होने देना चाहती. यदि किसी स्कूल में इस तरह की समस्या सामने आती है तो प्रशासकों को जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआई) अथवा शिक्षा विभाग से संपर्क कर समाधान निकालने का निर्देश दिया गया है. विभाग के अनुसार, कुछ स्कूलों ने फिलहाल अंशकालिक शिक्षकों को आंशिक भुगतान करने की पहल भी शुरू कर दी है.
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