तृणमूल शासित बोर्ड में 2000 करोड़ का घोटाला, तीन हजार से अधिक हुए अवैध निर्माण का दावा

Bengal News: व्हिसल ब्लोअर्स नामक एनजीओ ने दावा किया है कि म्युनिसिपल एक्ट को ताख पर रखकर अवैध निर्माण को वैध किया गया

Bengal News: हावड़ा. वर्ष 2013 में हावड़ा नगर निगम में तृणमूल कांग्रेस के बोर्ड गठन के बाद उम्मीद जतायी जा रही थी कि अवैध निर्माण पर रोक लगेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. तृणमूल शासित बोर्ड के कार्यकाल में अवैध निर्माण धड़ल्ले से हुआ और वर्ष 2013 से लेकर 2020 तक निगम इलाके में 3000 से अधिक अवैध निर्माण हुए हैं और निगम के बिल्डिंग विभाग में 2000 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है. व्हिसल ब्लोअर्स नामक एक संस्था ने संवाददाता सम्मेलन कर इस बात की जानकारी दी. सम्मेलन का आयोजन हावड़ा मैदान स्थित आइएमए हॉल में किया गया था.

घोटाले में मंत्री से लेकर पार्षद तक शामिल

संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए संस्था के सदस्य व सीनियर वकील सब्यसाची चटर्जी ने कहा कि वर्ष 2013 से 2020 तक शहरी अंचल में तीन हजार से अधिक अवैध निर्माण हुए हैं और इस काम में 2000 करोड़ रुपये का गबन हुआ है. इस गबन में सिर्फ निगम के अधिकारी ही नहीं, बल्कि पूर्व मंत्री अरूप राय सहित तमाम पूर्व पार्षद और प्रमोटर शामिल हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि बाली, उत्तर हावड़ा और मध्य हावड़ा में बिना किसी रोक-टोक के अवैध निर्माण हुआ है. उन्होंने कहा कि अवैध निर्माण होने के बाद निगम ने प्रमोटर से जुर्माना लेकर इसे वैध कर दिया, जबकि म्युनिसिपल एक्ट में यह गैर-कानूनी है.

एक्सपर्ट कमेटी बनाने की मांग

उन्होंने कहा कि जब निगम अधिकारियों से आरटीआइ के तहत यह पूछा गया कि किस कानून के तहत अवैध निर्माण को वैध किया गया, तो निगम की ओर से यह जवाब दिया गया कि बड़े अधिकारियों के कहने पर ऐसा किया गया. ये बड़े अधिकारी कौन हैं, यह पता लगाना अब जरूरी है. मुझे उम्मीद है कि नयी सरकार इस संबंध में सही कार्रवाई करेगी. इसके लिए एक एक्सपर्ट कमेटी बनाना चाहिए और समस्या का समाधान कानूनी तरीकों से होना चाहिए, न कि बुलडोजर से. सब्यसाची चटर्जी ने कहा कि जिन तृणमूल नेताओं ने अवैध निर्माण कर लोगों को फ्लैट बेचकर धोखा दिया है, उन नेताओं से हिसाब चुकता किया जाये.

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नेताओं के इशारे पर हुआ अवैध निर्माण

संस्था के सदस्य आत्म प्रकाश सिंह ने कहा कि जब हावड़ा नगर निगम और बाली नगरपालिका के बिल्डिंग विभाग के अधिकारियों से अवैध निर्माण की सूची मांगी गयी, तो उनलोगों ने यह कहकर देने से इंकार कर दिया कि प्रशासक ने मना किया है. उन्होंने कहा कि यह कैसे संभव है कि जब धड़ल्ले से अवैध निर्माण हो रहा हो, तो इसकी जानकारी उस क्षेत्र के विधायक को नहीं हो. ये विधायक भी निगम के प्रशासनिक बोर्ड के सदस्य थे और सब कुछ इन नेताओं के इशारे पर हुआ है. उन्होंने कहा कि इस संबंध में हाइकोर्ट में एक जनहित याचिका भी दायर की गयी है. कोर्ट ने निगम से अवैध निर्माण को लेकर जवाब मांगा है. नयी सरकार इस मसले को गंभीरता से ले और कड़ी कार्रवाई करे.

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Published by: Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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