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Bengal News : कोलकाता: कोलकाता नगर निगम के बाल शिक्षा केंद्र के शिक्षकों को चार माह से मानदेय नहीं मिला है. मानदेय नहीं मिलने के कारण म्युनिसिपल स्कूल के शिक्षकों की हालत बहुत खराब है. बंगाल में म्युनिसिपल स्कूल के शिक्षकों को मानदेय के रूप में मात्र 10 हजार रुपये मिलते हैं. पिछले कई महीनों से रुका हुआ है. सर्व शिक्षा मिशन के तहत केंद्र और राज्य मिलकर इन स्कूलों का संचालन करते हैं. बंगाल सरकार का दावा है कि केंद्र सरकार शिक्षा अभियान की राशि नहीं दे रही है. इसी वजह से शिक्षकों का मानदेय भुगतान नहीं किया जा रहा है. दूसरी ओर भाजपा नेता बंगाल सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहे हैं.
क्या है समस्या
एसएसके और एमएसके शिक्षकों के वेतन में हर साल 3 प्रतिशत तक की वृद्धि होती है. हालांकि उन्हें सेवानिवृत्ति भत्ता मिलता है. शिक्षक अमन बोस ने कहा कि शिक्षा का स्तर तो हाई स्कूल के बराबर है, लेकिन वेतन बहुत कम है. हमें पेंशन मिलनी चाहिए, लेकिन वह भी नहीं मिलती. हम इसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इससे पहले भी कई लोग सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन वे खाली हाथ सेवानिवृत्त हुए. एक अन्य कर्मचारी ने कहा- बाल शिक्षा केंद्र में प्राथमिक विद्यालय की तुलना में अधिक छात्र थे, लेकिन प्राथमिक विद्यालय के विपरीत, यहां कपड़े और जूते उपलब्ध नहीं हैं. इसी वजह से वे बच्चों को प्रवेश नहीं दे रहे हैं. हर साल छात्रों की संख्या 5-7 कम हो रही है.
केंद्र नहीं बढ़ा रहा मानदेय
नगरपालिका के शिक्षकों को इसका भुगतान नहीं किया जाता है. कर्मचारियों का कहना है कि सरकार की ओर से उपलब्ध कराए गए मुफ्त कपड़े और जूते भी बाल शिक्षा केंद्रों तक नहीं पहुंचते. यहां तक कि बच्चों की किताबें और नोटबुक भी समय पर नहीं पहुंचतीं. नॉर्थ डम डम चाइल्ड एजुकेशन सेंटर के एक कर्मचारी ने कहा- वेतन बहुत कम है. अगर वेतन थोड़ा ज्यादा होता तो बहुत सुविधा होती. जो है वो भी समय पर मिलता तो हम दाने-दाने को मोहताज नहीं होते. इस विषय पर शिक्षा मंत्री ब्रात्या बसु ने कहा- केंद्र सरकार ने कई हजार करोड़ रुपये रोक रखे हैं. मुख्यमंत्री ने खुद कहा था कि सभी शिक्षा कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि की जानी चाहिए, लेकिन जब तक केंद्र सरकार उनका बकाया वेतन जारी नहीं करती, तब तक हम वेतन में वृद्धि नहीं कर पाएंगे.
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