बंगाल में लोकतंत्र की ‘सुनामी’, 74 साल का रिकॉर्ड टूटा, शाम 5 बजे तक 92.35 फीसदी मतदान, क्या यह महा-परिवर्तन की आहट?

Bengal Election 2026 Voting Percentage: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में वोटिंग के सारे रिकॉर्ड टूट गये हैं. शाम 5 बजे तक 92.07 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो 2021 से 10.51 प्रतिशत अधिक है. जानें 1952 से अब तक के वोटिंग का पूरा इतिहास.

Bengal Election 2026 Voting Percentage: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में बंगाल की जनता ने वो कर दिखाया है, जो भारतीय चुनावी इतिहास में विरले ही देखने को मिलता है. निर्वाचन आयोग की कड़ी मेहनत और जागरूक मतदाताओं के जोश ने इस बार वोटिंग के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिये हैं.

2021 से 10.51 प्रतिशत अधिक वोट पड़े बंगाल में

चुनाव आयोग की ओर से रात 9 बजे तक के आंकड़े जारी कर दिये गये हैं. इसके मुताबिक, बंगाल में 92.35 प्रतिशत ऐतिहासिक मतदान दर्ज किया गया है. यह 2021 के चुनाव (81.56 प्रतिशत) के मुकाबले 10.79 प्रतिशत अधिक है. आंकड़ों का यह उछाल राज्य की राजनीति में किसी बड़े भूचाल या ‘महा-परिवर्तन’ की ओर इशारा कर रहा है.

2011 का रिकॉर्ड भी पीछे छूटा, जब खत्म हुआ था वामपंथ

बंगाल के चुनावी इतिहास को देखें, तो अब तक का सबसे अधिक मतदान वर्ष 2011 में हुआ था. उस समय 84.33 फीसदी वोट पड़े थे और ममता बनर्जी की लहर ने 34 साल पुराने वाम किले को ढाह दिया था. वर्ष 2026 के चुनाव ने उस ऐतिहासिक आंकड़े को भी बहुत पीछे छोड़ दिया. 5 बजे तक ही लगभग 90 प्रतिशत वोटिंग होना बताता है कि जनता इस बार किसी बड़े मुद्दे पर गोलबंद होकर बूथों तक पहुंची थी.

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आजादी के बाद से अब तक वोटिंग का पैटर्न

बंगाल में मताधिकार के इस्तेमाल का ग्राफ उतार-चढ़ाव भरा रहा है, लेकिन 2026 ने एक नयी ऊंचाई छुई है.

  • शुरुआती दौर (1952-1962): 1952 के पहले चुनाव में केवल 42.23 प्रतिशत वोटिंग हुई थी, जो 1962 तक बढ़कर 55.55 प्रतिशत पहुंची.
  • 60 फीसदी का आंकड़ा : वर्ष 1967 में पहली बार 60 फीसदी की दीवार टूटी और 66.1 प्रतिशत मतदान हुआ.
  • गिरावट का दौर (1971-1977): वर्ष 1971 से 1977 के बीच मतदान में गिरावट आयी. वर्ष 1977 में केवल 56.15 प्रतिशत वोटिंग हुई. 1977 ही वह साल था, जब कांग्रेस का बंगाल में पतन शुरू हो गया. ज्योति बसु के नेतृत्व में वाममोर्चा का उदय हुआ.
  • वाम शासन और तेजी : वर्ष 1982 के बाद वोटिंग प्रतिशत में एक बार फिर उछाल आया और 1996 में यह 82.94 प्रतिशत तक जा पहुंचा.
  • ममता बनर्जी का उदय : वर्ष 2011 में बंगाल ने बंपर वोटिंग करते हुए सारे रिकॉर्ड तोड़ डाले. इस साल 84.3 प्रतिशत वोट पड़े और बुद्धदेव भट्टाचार्य के नेतृत्व में चल रही वाममोर्चा की सरकार को सत्ता से बेदखल कर ममता बनर्जी बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं.

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Bengal Election 2026 Voting Percentage: 21वीं सदी और बदलता पैटर्न

वर्ष 2001 में मतदान गिरकर 75.29 प्रतिशत रह गया था, लेकिन 2006 के बाद से यह लगातार 80 फीसदी के ऊपर बना रहा है. पिछले 2 चुनावों (2016 और 2021) में वोटिंग प्रतिशत 82 प्रतिशत के आसपास स्थिर था, जिसे 2026 की ‘लोकतांत्रिक सुनामी’ ने पूरी तरह बदल दिया है.

लाठी के सहारे मतदान करने पहुंचीं बुजुर्ग मतदाता.

2026 का पहला चरण : एक-एक जिले का आंकड़ा यहां देखें

जिले का नामवोट प्रतिशत
कूचबिहार92.07
अलीपुरदुआर88.74
जलपाईगुड़ी91.2
कलिम्पोंग81.98
दार्जिलिंग86.49
उत्तर दिनाजपुर89.74
दक्षिण दिनाजपुर93.12
मालदा89.56
मुर्शिदाबाद91.36
पूर्व मेदिनीपुर88.55
पश्चिम मेदिनीपुर90.7
झारग्राम90.53
पुरुलिया87.35
बांकुड़ा89.91
पश्चिम बर्धमान86.89
बीरभूम91.55
स्रोत : इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (23 अप्रैल 2026 को शाम 5 बजे तक के आंकड़े)

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क्या कहते हैं ये आंकड़े?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब भी मतदान के प्रतिशत में इतना भारी इजाफा (8 प्रतिशत से ज्यादा) होता है, तो वह अक्सर सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) या किसी विशेष मुद्दे पर जनता के ध्रुवीकरण का परिणाम होता है. 1982 और 2011 के उदाहरणों से साफ है कि भारी मतदान बंगाल में हमेशा ‘परिवर्तन’ लाता है. अब 4 मई को आने वाले नतीजे ही बतायेंगे कि 89.93 प्रतिशत वोटिंग की यह गूंज किसके पक्ष में गयी है.

2021 की तरह 2026 में भी भारी संख्या में महिलाएं निकलीं मतदान करने.

16 जिलों की 152 सीटों पर चुनाव संपन्न, अब 29 अप्रैल की तैयारी

बंगाल में इस बार दो चरणों में चुनाव कराये जा रहे हैं. कड़ी सुरक्षा के बीच छिटपुट घटनाओं के बीच पहले चरण का मतदान गुरुवार को संपन्न हो गया. दूसरे और अंतिम चरण की वोटिंग 29 अप्रैल (बुधवार) को होगी. उस दिन राज्य की बाकी बची 142 विधानसभा सीटों पर लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे. सभी 294 सीटों की मतगणना 4 मई को होगी और उसी दिन पता चल जायेगा कि बंगाल में अगली सरकार किसकी बनेगी. ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनेंगी या भाजपा उनको सत्ता से बेदखल कर देगी.

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पहले चरण की 152 सीटों पर वोट के आंकड़े यहां देखें

विधानसभा का नामवोट प्रतिशत
मेकलीगंज (एससी)94.96
माथाभांगा (एससी)95.15
कूचबिहार उत्तर (एससी)95.11
कूचबिहार दक्षिण93.35
शीतलकुची (एससी)96.45
सिताई (एससी)96.43
दीनहाटा95.45
नाटाबाड़ी94.96
तूफानगंज93.97
कुमारग्राम (एसटी)93.58
कालचीनी (एसटी)88.32
अलीपुरडुआर्स92
फाटाकाला (एससी)94.17
मदारीहाट (एसटी)87.83
धूपगुड़ी (एससी)95.18
मयनागुड़ी (एससी)96.39
जलपाईगुड़ी (एससी)92.36
राजगंज (एससी)95.72
डाबग्राम-फूलबाड़ी92.95
माल (एसटी)93.84
नागराकाटा (एसटी)91.99
कलिम्पोंग82.99
दार्जिलिंग82.12
कर्सियोंग82.18
माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी (एससी)92.15
सिलीगुड़ी90.3
फांसीदेवा (एसटी)94.62
चोपड़ा93.99
इस्लामपुर90.83
गोआलपोखर91.47
चाकुलिया90.26
करनदीघी94.29
हेमताबाद (एससी)95.1
कालियागंज (एससी)95.13
रायगंज91.95
ईटाहार95.68
कूष्मांडी (एससी)95.56
कुमारगंज95.81
बालूरघाट93.3
तपन (एसटी)94.91
गंगारामपुर (एससी)95.4
हरिरामपुर96
हबीबपुर (एसटी)93.75
गजोले (एससी)92.96
चांचल93.99
हरिश्चंद्रपुर93.72
मालतीपुर93.1
रतुआ92.86
मानिकचक94.74
मालदा (एससी)94.43
इंगलिशबाजार89.67
मोथाबाड़ी94.59
सूजापुर92.98
वैष्णवनगर94.68
फरक्का96.05
शमशेरगंज96.04
सुती95.9
जंगीपुर95.33
रघुनाथगंज96.81
सागरदीघी95.21
लालगोला96.2
भगवानगोला96.95
रानीनगर96.03
मुर्शिदाबाद94.82
नबग्राम (एससी)90.44
खरग्राम (एससी)88.21
बरवान (एससी)87.8
कांडी84.89
भरतपुर88.76
रेजीनगर92.02
बेलडांगा92.89
बहरमपुर91.29
हरिहरपाड़ा95.21
नोदा93.41
डोमकल95.73
जालंगी95.01
तमलूक91.82
पांंशकुड़ा पूर्व90.23
पांशकुड़ा पश्चिम91.63
मयना89.88
नंदकुमार92.1
महिषादल89.26
हल्दिया (एससी)90.66
नंदीग्राम92.06
चंडीपुर89.39
पटाशपुर92.21
कांथी उत्तर89.96
भगवानपुर92.15
खेजुरी (एससी)90.2
कांथी दक्षिण87.75
रामनगर89.08
एगरा91.21
दांतन91.89
केशियारी (एसटी)90.55
खड़गपुर सदर92.49
नारायणगढ़92.53
सबंग93.05
पिंगला88.42
खड़गपुर93.13
डेबरा92.64
दासपुर94.21
घाटाल (एससी)94.93
चंद्रकोना (एससी)92.42
गड़बेता84.46
सालबनी86.46
केशपुर (एससी)92.99
मेदिनीपुर94.72
नयाग्राम (एसटी)94.7
गोपीबल्लभपुर94.26
झारग्राम92.13
बिनपुर (एसटी)92.58
बांदवान (एसटी)91.27
बलरामपुर92.27
बाघमुंडी90.5
जॉयपुर90.24
पुरुलिया89.26
मानबाजार (एसटी)89.5
काशीपुर86.44
पाड़ा (एससी)91.02
रघुनाथपुर (एससी)91.72
सालतोड़ा (एससी)92.85
छातना89.11
रानीबांध (एसटी)89.68
रायपुर (एसटी)90.68
तालडांगड़ा90.53
बांकुड़ा90.32
बरजोड़ा92.05
ओंडा93.04
विष्णुपुर92.23
कोतुलपुर (एससी)93.29
इंडास (एससी)94.03
सोनामुखी (एससी)93.28
पांडवेश्वर91.2
दुर्गापुर पूर्व89.35
दुर्गापुर पश्चिम89.51
रानीगंज90.24
जामुड़िया91.25
आसनसोल दक्षिण89.54
आसनसोल उत्तर88.13
कुल्टी89.14
बाराबनी90.59
दुबराजपुर (एससी)94.53
सूरी92.62
बोलपुर93.62
नानूर (एससी)93.43
लाभपुर94.21
सैंथिया (एससी)94.9
मयूरेश्वर93.72
रामपुरहाट93.64
हांसन94.87
नलहाटी95.16
मुराराई95.5
कुल वोट प्रतिशत92.35

असम, केरलम और पुडुचेरी से भी ज्यादा वोट पड़े

वर्ष 2026 में 9 अप्रैल को असम और केरलम के साथ-साथ पुडुचेरी में भी चुनाव हुए थे. असम में 85.91 प्रतिशत, केरलम में 78.27 प्रतिशत और पुडुचेरी में 89.87 प्रतिशत वोटिंग हुई थी. बंगाल में इन दोनों राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी से अधिक मतदान हुआ है.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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