बंगाल में भोजूडीह कोल वॉशरी शुरू, इस्पात उद्योग को मिलेगा देसी कोकिंग कोयला, आयात पर खर्च होने वाले अरबों रुपए बचेंगे

Coking Coal Washery West Bengal: कोल इंडिया की इकाई BCCL ने पश्चिम बंगाल में 20 लाख टन क्षमता वाली भोजूडीह कोकिंग कोल वॉशरी का परिचालन शुरू कर दिया है. इससे इस्पात उद्योग को सस्ते और उच्च गुणवत्ता वाले स्वदेशी कोयले की आपूर्ति होगी और आयात घटेगा.

Coking Coal Washery West Bengal: भारतीय अर्थव्यवस्था और औद्योगिक क्षेत्र के लिए पश्चिम बंगाल से एक बेहद उत्साहजनक खबर सामने आयी है. कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) की प्रमुख इकाई भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) ने राज्य में अपनी अत्याधुनिक भोजूडिह कोकिंग कोयला वॉशरी में व्यावसायिक परिचालन (Commercial Operations) शुरू करने का औपचारिक ऐलान कर दिया है. 20 लाख टन सालाना क्षमता वाली इस वॉशरी के शुरू होने से अब भारतीय इस्पात (Steel) उद्योग को उच्च गुणवत्ता वाले कोकिंग कोयले के लिए पूरी तरह विदेशों पर निर्भर नहीं रहना होगा.

26 मई से भोजूडीह में काम शुरू, इस्पात क्षेत्र को मिली नयी ताकत

बीसीसीएल ने शेयर बाजार (BSE) को दी गयी अपनी आधिकारिक सूचना में पुष्टि की है कि भोजूडीह कोयला वॉशरी ने 26 मई, 2026 से अपना व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है. इस्पात उत्पादन में कोकिंग कोयला एक अनिवार्य कच्चा माल है, जिसकी धुलाई और गुणवत्ता सुधारने में यह नयी सुविधा मील का पत्थर साबित होगी.

  • विदेशी मुद्रा की बचत : वर्तमान में भारत अपनी कोकिंग कोयले की जरूरतों के लिए आयात पर भारी विदेशी मुद्रा खर्च करता है. स्वदेशी वॉशरी शुरू होने से इस खर्च में बड़ी कटौती होगी.
  • बनाओ, चलाओ और देखरेख करो (BOM) मॉडल : इस वॉशरी का निर्माण और संचालन आधुनिक बीओएम मॉडल के तहत किया गया है, जो कुशलता और गुणवत्ता सुनिश्चित करता है.
  • तीन-उत्पाद तकनीक : यह एक मध्यम क्षमता वाली 3-प्रोडक्ट वॉशरी है, जो कच्चे कोयले को साफ कर उसे इस्पात कारखानों के उपयोग के लायक बनायेगी.

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क्यों खास है भोजूडीह वॉशरी?

पश्चिम बंगाल के औद्योगिक मानचित्र पर भोजूडीह का स्थान हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है, लेकिन इस नयी वॉशरी की शुरुआत ने इसे ग्लोबल स्टैंडर्ड के करीब खड़ा कर दिया है.

  • सालाना 20 लाख टन क्षमता : यह संयंत्र हर साल 20 लाख टन कच्चे कोयले की धुलाई करने में सक्षम है, जिससे गुणवत्तापूर्ण कोकिंग कोयले की निरंतर आपूर्ति बनी रहेगी.
  • आत्मनिर्भरता : यह कदम केंद्र सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देता है, क्योंकि कोकिंग कोयले का घरेलू उत्पादन बढ़ने से वैश्विक आपूर्ति शृंखला (Supply Chain) के झटकों से भारतीय स्टील सेक्टर सुरक्षित रहेगा.
  • रोजगार के अवसर : वॉशरी के पूर्ण परिचालन से स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नये अवसर पैदा होने की उम्मीद है.

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Coking Coal Washery West Bengal: विदेशी आयात पर सर्जिकल स्ट्राइक

कोल इंडिया की यह पहल सीधे तौर पर उन देशों के बाजार को प्रभावित करेगी, जहां से भारत भारी मात्रा में कोकिंग कोयला मंगवाता है. बंगाल की मिट्टी से निकलने वाला कोयला जब आधुनिक तकनीक से धुलेगा, तो उसकी राख (Ash Content) कम होगी और कैलोरी मान बढ़ेगा. यह न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि इस्पात निर्माण की लागत को भी कम करेगा.

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By Mithilesh Jha

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