सुंदरबन में बाघ से जंग : मौत के आंकड़े घटे, पर खतरा बरकरार

आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में सुंदरबन क्षेत्र में बाघ के हमले से सात लोगों की मौत हो गयी, जबकि पांच लोग घायल हुए हैं.

अमित शर्मा, कोलकाता

विश्व धरोहर क्षेत्र दक्षिण 24 परगना के सुंदरबन में मानव व बाघ संघर्ष पिछले पांच वर्षों में लगातार सुर्खियों में रहा है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 से 2025 के बीच करीब 21 लोगों की मौत हुई और 22 से ज्यादा लोग घायल हुए. हाल के दो वर्षों में मौतों में कुछ कमी दिखी है, लेकिन जोखिम अब भी बना हुआ है. आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में सुंदरबन क्षेत्र में बाघ के हमले से सात लोगों की मौत हो गयी, जबकि पांच लोग घायल हुए हैं. इधर, वर्ष 2022 में बाघ के हमले में मरने वालों की संख्या पांच व घायलों की संख्या छह से ज्यादा रही, जबकि वर्ष 2023 में मरने वालों की संख्या चार और घायलों की संख्या पांच, वर्ष 2024 में मृतकों की संख्या तीन व घायलों की संख्या पांच और वर्ष 2025 में मरने वालों की संख्या दो व घायलों की संख्या चार से ज्यादा रही.

कहां और कैसे होते हैं हमले

अधिकांश घटनाएं जंगल से सटे क्रीक, दलदली किनारों और मैंग्रोव पट्टियों में होती हैं. मछली और केंकड़ा पकड़ने वाले और शहद/लकड़ी संग्रह करने वाले लोग रोजी-रोटी के लिए इन इलाकों में जाते हैं. ज्वार-भाटा और घना मैंग्रोव बाघ की मौजूदगी का अंदाजा लगाना कठिन बना देता है. कई मामलों में बाघ पीछे से हमला करता है.

प्रशासन के कदम

वन विभाग ने बीते वर्षों में नायलॉन नेट-फेंस की ऊंचाई बढ़ाने, कमजोर हिस्सों की मरम्मत, संवेदनशील बिंदुओं पर ट्रैप कैमरा और गश्त बढ़ाने जैसे कदम उठाये हैं. कुछ इलाकों में सेंसर-आधारित चेतावनी प्रणाली भी लगायी गयी है, ताकि बाघ की हलचल का समय रहते पता चल सके. अधिकारियों का दावा है कि इन उपायों से 2023 के बाद मौतों में गिरावट आयी है. अधिकारियों का कहना है कि बाघ को नुकसान पहुंचाये बिना उसे जंगल की ओर रखना ही प्राथमिकता है.

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By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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