पूर्व मंत्री ने कहा- प्रक्रिया के लिए अधिक समय और स्पष्ट दिशानिर्देश जरूरी थे
संवाददाता, कोलकातासुंदरबन विकास विभाग के पूर्व मंत्री और माकपा के वरिष्ठ नेता कांति गांगुली ने दावा किया है कि एसआइआर से सबसे अधिक प्रभावित बांग्लादेश से आकर राज्य में बसे हिंदू होंगे. एसआइआर प्रक्रिया के तहत शुक्रवार को हीयरिंग के लिए बुलाये जाने से पहले उन्होंने यह बयान दिया.कांति गांगुली ने कहा कि वह एसआइआर प्रक्रिया के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसे केवल दो-तीन महीनों की अवधि में लागू करने के बजाय लंबी अवधि में किया जाना चाहिए था. उन्होंने इसे एक अत्यंत बड़ा और चुनौतीपूर्ण कार्य बताते हुए कहा कि प्रक्रिया को अधिक त्रुटिरहित और सटीक बनाने के लिए चुनाव आयोग को ज्यादा समय देना चाहिए था. गांगुली के अनुसार, भारत जैसे विशाल देश में, जहां जनसंख्या बहुत अधिक है, मतदाता सूचियों के बेहतर और निष्पक्ष पुनरीक्षण के लिए पर्याप्त समय आवश्यक है. पूर्व मंत्री ने कहा, “मैं सुंदरबन क्षेत्र से आता हूं. यहां बांग्लादेश से आकर बसे हिंदुओं की बड़ी आबादी है. इस प्रक्रिया से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले यही लोग होंगे.”
उन्होंने यह भी कहा कि निर्वाचन आयोग को एसआइआर के लिए पहले से स्पष्ट और ठोस दिशानिर्देश तैयार करने चाहिए थे, ताकि मतदाताओं में भ्रम की स्थिति न बने और गलत अटकलें व निराधार सिद्धांत फैलने से रोके जा सके. एसआइआर प्रक्रिया के विरोध को लेकर कांति गांगुली ने कहा कि विरोध करना एक लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन प्रदर्शन करने वालों को चाहिए कि वे इस प्रक्रिया की वास्तविक और ठोस कमियों को सामने रखें. उल्लेखनीय रहे कि कांति गांगुली (82) वर्ष 2001 से 2011 तक सुंदरबन विकास विभाग के मंत्री रहे. साथ ही 2009 से 2011 तक उन्होंने कुछ समय के लिए राज्य के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री के रूप में भी अपनी सेवाएं दी थीं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
