शताब्दी पुराने श्मशान घाट पर अतिक्रमण का आरोप

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य को जारी किया नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य को जारी किया नोटिस

कोलकाता. सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मेदिनीपुर के विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) से संबंधित गरीब आदिवासी निवासियों के एक समूह की ओर से दायर याचिका पर पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया है, जिन्होंने एक निजी कंपनी पर उनके सदियों पुराने श्मशान घाट पर अतिक्रमण करने का प्रयास करने का आरोप लगाया है. सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डॉ अलख आलोक श्रीवास्तव द्वारा प्रस्तुत याचिका में आदिवासी समुदाय के पारंपरिक श्मशान घाट के तत्काल संरक्षण की मांग की गयी है. इसमें कहा गया है कि इस भूमि का उपयोग अनादि काल से अंतिम संस्कार के लिए किया जाता रहा है और यह उनके लिए गहरा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है. सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने राज्य से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा. न्यायालय ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के 17 जुलाई के आदेश के प्रभाव और संचालन पर भी रोक लगा दी, जिसमें याचिकाकर्ताओं को राहत देने से इनकार कर दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट में अब राज्य सरकार और निजी कंपनी द्वारा अपने-अपने जवाबी हलफनामे दाखिल करने के बाद इस मामले की सुनवाई होगी.

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By SANDIP TIWARI

SANDIP TIWARI is a contributor at Prabhat Khabar.

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