एसएससी ग्रुप-सी नियुक्ति घोटाले में पार्थ समेत 28 के खिलाफ आरोप तय

अदालत में वर्चुअली पेश हुए पूर्व शिक्षा मंत्री, कहा : निर्दोष हूं, रिहाई दें

गुहार. अदालत में वर्चुअली पेश हुए पूर्व शिक्षा मंत्री, कहा : निर्दोष हूं, रिहाई दें

सरकारी वकील ने अदालत में कहा: वर्ष 2016 से 2022 के बीच षडयंत्र के तहत योग्य अभ्यर्थियों से धोखाधड़ी कर नियुक्तियां की गयीं

कोलकाता. स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) के जरिये राज्य के सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में ग्रुप-सी पदों पर हुईं नियुक्तियों के घोटाले में शुक्रवार को अलीपुर अदालत स्थित स्पेशल सीबीआइ कोर्ट में पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी समेत 28 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किये गये. मामले की सुनवाई के दौरान चटर्जी अस्पताल से वर्चुअल माध्यम से पेश हुए और स्वयं को निर्दोष बताते हुए अदालत से रिहाई की मांग की. सरकारी पक्ष का तर्क : सरकारी वकील ने अदालत में कहा कि वर्ष 2016 से 2022 के बीच षडयंत्र के तहत योग्य अभ्यर्थियों से धोखाधड़ी कर नियुक्तियां की गयीं.

इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड से छेड़छाड़ हुई. नकली दस्तावेजों का इस्तेमाल असली मानकर किया गया. नियुक्तियों में पदों की फेरबदल और सलाहकारों को बदलने जैसे कदम उठाये गये. सरकारी पक्ष ने यह भी दावा किया कि जांच में आरोपियों के बीच मेलजोल और साजिश के ठोस सबूत मिले हैं.

अगली सुनवाई सोमवार को : अदालत ने कहा कि मामले में गवाहों की पेशी और आगे की जांच के बाद ही आरोपों की मजबूती का पता चल पायेगा. पार्थ चटर्जी की मेडिकल स्थिति को देखते हुए अदालत ने उन्हें अगली सुनवाई तक वर्चुअल रूप से पेश होने की अनुमति दी है. मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी.

बोले पार्थ : डॉक्टरेट हूं, सबको पढ़ा सकता हूं

पार्थ चटर्जी ने अदालत में कहा : मैं निर्दोष हूं. केंद्रीय एजेंसियां प्रतिशोध की भावना से मेरे खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं. मेरी सामाजिक प्रतिष्ठा है और इसे बचाना अदालत का कर्तव्य है. साढ़े तीन साल से जेल में बंद हूं. मंत्री रहते हुए शिक्षा क्षेत्र में कई संस्थान स्थापित कराये हैं. लेकिन आज बिना साक्ष्य के मुझे दोषी ठहराया जा रहा है, जिससे न्याय व्यवस्था पर लोगों का विश्वास डगमगा सकता है. मैं डॉक्टरेट हूं, सबको पढ़ा सकता हूं. अभी बीमार और असहाय हो गया हूं. मुझे रिहाई दी जाये.

चार्ज गठन पर अदालत की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने कहा कि चार्ज तय करने का आधार नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितताओं के प्रमाण हैं. अदालत ने पार्थ चटर्जी के साथ-साथ एसएससी सलाहकार समिति के तत्कालीन चेयरमैन शांतिप्रसाद सिन्हा और कल्याणमय गांगुली की भूमिका का भी उल्लेख किया. साथ ही सुनवाई के दौरान एसएससी की पूर्व अधिकारी पर्णा बसु का नाम भी सामने आया. अदालत को बताया गया कि बसु पहले गवाह थीं. बाद में आरोपी के रूप में शामिल की गयीं. न्यायाधीश ने पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी को स्पष्ट किया कि गवाहों की पेशी के दौरान उन्हें अपनी दलीलें रखने का पूरा अवसर मिलेगा.

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By SANDIP TIWARI

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