ढाई साल से हैं कैद, परिवारों की बढ़ी चिंता
संवाददाता, कोलकातादक्षिण 24 परगना जिले के नामखाना क्षेत्र के तीन मछुआरे पिछले करीब ढाई साल से पाकिस्तान की जेल में बंद हैं. हाल के महीनों में उनसे संपर्क पूरी तरह टूट जाने से परिजनों की चिंता और बढ़ गयी है. जेल में बंद मछुआरों की पहचान तपन महापात्र (50), काशीनाथ मंडल (58) और दिलीप बाग (48) के रूप में हुई है. परिजनों के अनुसार, पहले कभी-कभी फोन या पत्र के जरिए उनका हालचाल मिल जाता था, लेकिन अब काफी समय से कोई सूचना नहीं मिली है.जानकारी के मुताबिक, तीनों मछुआरे काम की तलाश में गुजरात गये थे और वहां से ट्रॉलर लेकर समुद्र में मछली पकड़ने जाते थे. समुद्र में जाने के करीब 20 दिन बाद पाकिस्तान के समुद्री सुरक्षा बल ने उन्हें पकड़ लिया. ट्रॉलर मालिक ने ही इस घटना की सूचना उनके परिवारों को दी थी. गिरफ्तारी के बाद कुछ समय तक मछुआरों को परिवार से फोन पर बात करने की अनुमति मिली थी. तपन महापात्र ने कराची की लांधी जेल से दो पत्र भी अपने घर भेजे थे, जिनमें उन्होंने अपनी स्थिति की जानकारी दी थी.
लेकिन पिछले कई महीनों से न तो कोई फोन आया है और न ही कोई चिट्ठी. परिजनों का कहना है कि यदि वे जेल में हैं, तो कम से कम संपर्क की अनुमति मिलनी चाहिए. अचानक संपर्क बंद हो जाने से तरह-तरह की आशंकाएं जन्म ले रही हैं. एक परिजन ने कहा कि उन्हें यह भी पता नहीं है कि उनके प्रियजन किस स्थिति में हैं और क्या उन्हें कानूनी सहायता मिल रही है या नहीं. इस मामले पर मथुरापुर के सांसद बापी हालदार ने कहा कि वह इस विषय को संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठायेंगे. उन्होंने बताया कि पहले भी भारतीय नागरिकों को विदेशों से वापस लाने के प्रयास किये गये हैं. सांसद ने भरोसा दिलाया कि तीनों मछुआरों को जल्द से जल्द स्वदेश वापस लाने के लिए पहल की जायेगी.