एसआर पद से इस्तीफा देने के बाद डॉ अनिकेत महतो ने शुरू किया चंदा अभियान

आरजी कर कांड को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाने वाले डॉ अनिकेत महतो ने सीनियर रेजिडेंट (एसआर) पद से इस्तीफा दे दिया है.

By AKHILESH KUMAR SINGH | January 7, 2026 1:59 AM

बॉन्ड की शर्तों के तहत 30 लाख रुपये जमा करने की बाध्यतासोशल मीडिया पर जारी किया क्यूआर कोड

संवाददाता, कोलकाताआरजी कर कांड को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाने वाले डॉ अनिकेत महतो ने सीनियर रेजिडेंट (एसआर) पद से इस्तीफा दे दिया है. इससे पहले वह वेस्ट बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फ्रंट के अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे चुके हैं. एसआर पद छोड़ने के बाद अब उन्होंने राज्य सरकार को बॉन्ड की राशि चुकाने के लिए आम लोगों से आर्थिक मदद की अपील की है. सोमवार रात डॉ अनिकेत महतो ने सोशल मीडिया पर एक क्यूआर कोड साझा करते हुए लिखा, “तुम मुझे पैसे दो, मैं तुम्हें न्याय दूंगा.” उन्होंने बताया कि सरकारी सीनियर रेजिडेंट पद एक बॉन्ड पोस्ट होता है और निर्धारित अवधि पूरी किए बिना पद छोड़ने पर सरकार को मुआवजा देना पड़ता है. बॉन्ड की शर्तों के अनुसार, उन्हें राज्य सरकार को 30 लाख रुपये जमा करने होंगे. डॉ अनिकेत महतो ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि उन्होंने राज्य सरकार के बॉन्ड के तहत सीनियर रेजिडेंट पद छोड़ा है. उन्होंने कहा कि वह विद्यासागर, विवेकानंद, रवींद्रनाथ और शरतचंद्र से प्रेरणा लेते हैं, लेकिन बॉन्ड की शर्तों के अनुसार 30 लाख रुपये की राशि चुकाना उनकी आर्थिक क्षमता से बाहर है. इसी कारण वह आम लोगों से सहयोग की उम्मीद कर रहे हैं. इसके लिए उन्होंने अपने बैंक खाते से संबंधित क्यूआर कोड साझा किया है. बताया गया है कि डॉ महतो का खाता साउथ इंडियन बैंक की सॉल्टलेक शाखा में है. डॉ अनिकेत महतो ने सोमवार को राज्य के स्वास्थ्य सचिव, स्वास्थ्य शिक्षा निदेशक और स्वास्थ्य निदेशक को एक लिखित पत्र भी भेजा था. पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें समय पर और कानूनी तरीके से नियुक्ति नहीं दी गयी, जिसके कारण वह अपना बहुमूल्य समय मरीजों की चिकित्सा में नहीं लगा सके. उन्होंने कहा कि इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हुई और उन्हें मानसिक तनाव का भी सामना करना पड़ा. इसी वजह से उन्होंने सीनियर रेजिडेंट पद पर कार्य करने में असमर्थता जतायी.वहीं, स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों के छात्र जनता के टैक्स के पैसे से चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करते हैं. इसी कारण एमबीबीएस, एमडी या एमएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद चिकित्सकों पर कुछ वर्षों तक सरकारी स्वास्थ्य सेवा में कार्य करने की बाध्यता होती है. यदि इसका पालन नहीं किया जाता है, तो बॉन्ड के तहत मुआवजा देना पड़ता है. अधिकारी ने स्पष्ट किया कि जब तक डॉ अनिकेत महतो 30 लाख रुपये की राशि जमा नहीं कर देते, तब तक उन्हें स्वास्थ्य विभाग की ओर से एनओसी या क्लियरेंस सर्टिफिकेट नहीं दिया जायेगा.

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