अभिषेक बनर्जी से सीआईडी ने साढ़े 8 घंटे की पूछताछ, कुणाल घोष से भी पूछे सवाल

Abhishek Banerjee Interrogated: पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति के लिए विधायकों के जाली हस्ताक्षर मामले में सीआईडी ने भवानी भवन मुख्यालय में टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी से साढ़े 8 घंटे और विधायक कुणाल घोष से 4 घंटे तक पूछताछ की. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

Abhishek Banerjee-Kunal Ghosh Interrogated: पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता की नियुक्ति के लिए विधायकों के हस्ताक्षरों की कथित जालसाजी के मामले में अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) ने रविवार को तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और विधायक कुणाल घोष से घंटों पूछताछ की. अभिषेक बनर्जी आज दूसरे दौर की पूछताछ के लिए यहां सीआईडी मुख्यालय पहुंचे थे. उनसे करीब साढ़े 4 घंटे तक पूछताछ हुई.

कुणाल घोष बोले- आमने-सामने बैठाकर की गयी पूछताछ

सीआईडी कार्यालय से बाहर निकलने के बाद बेलेघाटा के विधायक घोष ने दावा किया कि पूछताछ के दौरान उन्हें और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव को आमने-सामने बैठाया गया था. लगभग 4 घंटे तक चली पूछताछ के बाद घोष ने कहा- मैंने उनके सभी सवालों के जवाब दिये हैं. मैंने उनकी जांच में सहयोग किया है.

पूछे गये 19 मई की बैठक से जुड़े सवाल

अभिषेक बनर्जी से पूछताछ साढ़े 8 घंटे से ज्यादा समय तक चली. एक भरोसेमंद सूत्र ने बताया कि सीआईडी अधिकारियों ने पहले अभिषेक बनर्जी और कुणाल घोष से अलग-अलग पूछताछ की. बाद में उन्हें आमने-सामने बैठाया. पूछताछ का रिकॉर्ड रखा गया है. जिस दिन (19 मई को) बैठक हुई थी, उस दिन से जुड़े सवाल पूछे गये थे. बैठक में कौन-कौन मौजूद था और प्रस्ताव पर किसने हस्ताक्षर किये, इस बारे में भी सवाल पूछे गये.

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पहली बार सांसद के जवाब से संतुष्ट नहीं थे अधिकारी

अधिकारियों ने बताया कि पिछले सप्ताह पूछताछ के दौरान डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी ने जो जवाब दिये थे, उससे जांच अधिकारी संतुष्ट नहीं थे. इसलिए उन्हें फिर से पूछताछ के लिए बुलाया गया. उन्होंने कहा कि टीएमसी नेता से उस बैठक के बारे में पूछा गया, जहां प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किये गये थे.

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Abhishek Banerjee-Kunal Ghosh Interrogated: 6 मई को कालीघाट में हुई थी पहली बैठक

तृणमूल कांग्रेस के विधायकों ने 6 मई को अभिषेक बनर्जी के कालीघाट आवास पर बैठक की थी और नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए शोभनदेव चट्टोपाध्याय के नाम का प्रस्ताव रखा था. खबरों के अनुसार, बैठक में मौजूद विधायकों ने हाथ उठाकर अपना समर्थन जताया. हालांकि, औपचारिक प्रस्ताव तुरंत विधानसभा को नहीं दिया गया. विधानसभा सचिवालय ने 13 और 14 मई को तृणमूल विधायकों के शपथ लेने के बाद पार्टी से इस पद के लिए अपने उम्मीदवार के नाम का प्रस्ताव देने को कहा था.

19 मई को सौंपे गये थे 70 विधायकों के हस्ताक्षर वाले दस्तावेज

इसके बाद 19 मई को फिर से बैठक हुई. इसके बाद चट्टोपाध्याय के समर्थन में 70 विधायकों के हस्ताक्षर वाला एक दस्तावेज सौंपा गया. बाद में तृणमूल विधायकों द्वारा जमा कराये गये अलग-अलग दस्तावेजों में हस्ताक्षरों में कथित अंतर पाये जाने के बाद सवाल उठे. इस मामले में आखिरकार प्राथमिकी दर्ज हुई और सीआईडी जांच शुरू हुई. सीआईडी इस मामले में पहले ही कई विधायकों से पूछताछ कर चुकी है.

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Published by: Mithilesh Jha

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