आधार कार्ड को कलकत्ता हाइकोर्ट ने बताया मौजूदगी का सबूत, नागरिकता को लेकर कही ये बात

कोलकाता हाईकोर्ट ने आधार कार्ड को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आधार संपत्ति पर व्यक्ति की मौजूदगी का प्रथम दृष्टया सबूत है. इस फैसले ने आधार की उपयोगिता पर नई बहस छेड़ दी है.

कोलकाता से अमर शक्ति प्रसाद की रिपोर्ट

कलकत्ता हाइकोर्ट ने हाल ही में आधार कार्ड को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. हाइकोर्ट ने कहा कि भले ही आधार निवास का पक्का सबूत न हो, लेकिन यह किसी संपत्ति पर व्यक्ति की मौजूदगी या कब्जा का प्रथम दृष्टया में सबूत जरूर है. ये टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट कोलकाता को गार्डनरीच इलाके में कथित तौर पर जर्जर हो चुकी इमारतों को गिराने से रोक दिया.

फैसले में दखल देने से इनकार

इससे पहले एक सिंगल-जज बेंच ने पोर्ट के उस फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया था, जिसके तहत ट्रस्ट अपनी जमीन पर बनी 33 इमारतों को गिराना चाहता था. कोर्ट ने कहा है कि आधार कार्ड किसी संपत्ति पर रहने का पहला सबूत माना जा सकता है. इस महत्वपूर्ण टिप्पणी के बाद, देश में आधार कार्ड की उपयोगिता पर एक बार फिर गहरा सवाल उठ खड़ा हुआ है. अब इसे सिर्फ एक पहचान पत्र ही नहीं, बल्कि कई जरूरी कामों का सशक्त माध्यम माना जा रहा है.

क्या है मामला?

पोर्ट अधिकारियों का तर्क था कि क्वार्टर में रहने वाले 52 लोगों में से सिर्फ 22 ने ही अपने आधार कार्ड दिखाये थे और सिंगल-जज बेंच का यह कहना सही था कि कब्जे का कोई सबूत नहीं दिया गया.

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कोर्ट ने आधार कार्ड पर क्या कहा

हाइकोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने गार्डनरीच में चलाये जा रहे बेदखली अभियान पर रोक लगाते हुए यह स्पष्ट किया कि आधार कार्ड संपत्ति का मालिकाना हक साबित नहीं करता, लेकिन यह पहली नजर में रहने का सबूत है. अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में पब्लिक प्रिमाइसेज एक्ट, 1971 के तहत व्यक्ति को कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए. डिवीजन बेंच ने कहा कि आधार नागरिकता या मूल निवास का सबूत नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसे किसी जगह पर कब्जे के सबूत के तौर पर पूरी तरह से अमान्य माना जाये.

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लेखक के बारे में

Published by: Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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