डेबरा को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में अनूठी पहल

पश्चिम मेदिनीपुर के डेबरा में टीबी मुक्त ब्लॉक बनाने के उद्देश्य से प्रशासन ने एक अनूठी पहल शुरू की है. इस पहल के तहत रोगियों को केवल मुफ्त दवाइयां ही नहीं, बल्कि पोषणयुक्त आहार भी उपलब्ध कराया जायेगा.

प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और शिक्षक बने टीबी रोगियों के संरक्षक

जीतेश बोरकर, खड़गपुर

पश्चिम मेदिनीपुर के डेबरा में टीबी मुक्त ब्लॉक बनाने के उद्देश्य से प्रशासन ने एक अनूठी पहल शुरू की है. इस पहल के तहत रोगियों को केवल मुफ्त दवाइयां ही नहीं, बल्कि पोषणयुक्त आहार भी उपलब्ध कराया जायेगा. प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि टीबी रोगियों को गोद लेकर उनके उपचार और दैनिक पोषण का जिम्मा संभाल रहे हैं.

शिक्षकों और पंचायत प्रतिनिधियों का योगदान ःशुचिस्मिता मंडल ने बताया कि उन्होंने सीएमओएच से प्रेरित होकर समाज के उपकार के लिए यह कदम उठाया है. बीडीओ ने बताया कि लगभग 60 शिक्षक इस पहल से जुड़े हैं और प्रत्येक ने एक-एक रोगी को गोद लिया है. डेबरा पंचायत समिति के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और ग्राम पंचायत के प्रमुख व कर्माध्यक्ष भी रोगियों की देखभाल में जुटे हैं. विशेष रूप से उपाध्यक्ष प्रदीप कर ने पांच रोगियों को गोद लिया है.

पोषण सामग्री और जिले की स्थिति

गोद लिये गये रोगियों को पोषण के लिए अंडा, दूध, घी, मांस, सोयाबीन और मसूर की दाल उपलब्ध कराये जायेंगे. यह सामग्री सप्ताह में या पंद्रह दिनों में रोगियों तक पहुंचायी जायेगी. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में प्रति वर्ष औसतन 4,500 से 4,600 नये टीबी रोगी सामने आते हैं, जबकि वर्तमान में करीब 2,600 रोगियों का उपचार चल रहा है. निक्षय मित्र परियोजना के तहत सरकार रोगियों को उपचार और पोषण के लिए 6,000 रुपये प्रदान करती है.

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इस तरह के गोद लेने वाले कार्यक्रम से रोगियों को बेहतर पोषण मिलेगा और उपचार भी प्रभावी ढंग से पूरा हो सकेगा.पश्चिम मेदिनीपुर जिले के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी सौमाशंकर सारंगी और जिला टीबी अधिकारी अभिजीत विश्वास ने इस पहल की सराहना की है. डेबरा के बीडीओ प्रियतब्रत राड़ी ने दो रोगियों को गोद लिया. उनकी पत्नी काबेरी और संयुक्त बीडीओ देवाशीष विश्वास भी दो रोगियों के पोषण की जिम्मेदारी संभालेंगे. पुलिस विभाग की ओर से एसडीपीओ देवाशीष राय, सीआइ, थाना अधिकारी और ट्रैफिक ओसी भी अभियान में सक्रिय रूप से शामिल हुए हैं. डेबरा बीएमओएच शुचिस्मिता मंडल ने अकेले चार रोगियों को गोद लिया है. उनके माता-पिता शिक्षक सुनील कुमार और मानसी मंडल ने भी दो-दो रोगियों की देखभाल का दायित्व लिया है.

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