नियुक्ति घोटाला: पार्थ चटर्जी, परेश अधिकारी समेत 21 के खिलाफ आरोप तय

काला चश्मा पहनकर अस्पताल के बेड से ही वर्चुअल माध्यम से अदालत में पेश हुए पार्थ

काला चश्मा पहनकर अस्पताल के बेड से ही वर्चुअल माध्यम से अदालत में पेश हुए पार्थ

कोलकाता. राज्य में स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) के जरिये नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं के मामले में गुरुवार को यहां अलीपुर कोर्ट स्थित सीबीआइ की विशेष अदालत में पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी समेत 21 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किये गये. 11वीं और 12वीं कक्षा के लिए शिक्षकों की नियुक्तियों के घोटाले में यह चार्ज गठन हुआ है. जिन लोगों पर आरोप तय हुए हैं, उनमें श्री चटर्जी के अलावा राज्य के पूर्व शिक्षा राज्यमंत्री परेश चंद्र अधिकारी, उनकी बेटी अंकिता अधिकारी, एसएससी सलाहकार समिति के तत्कालीन चेयरमैन शांतिप्रसाद सिन्हा, सुबीरेश भट्टाचार्य, कल्याणमय गांगुली, अशोक कुमार साहा, पर्णा बसु, पंकज बंसल, नीलाद्री दास व अन्य शामिल हैं. अदालत ने आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं में आरोप तय किये हैं. इनमें आपराधिक साजिश (120बी), सबूत छिपाना (201), धोखाधड़ी (420), जाली दस्तावेज तैयार करना (467), जालसाजी (468) और जाली दस्तावेज का इस्तेमाल करना (471) शामिल है. यह पहला अवसर है, जब केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआइ द्वारा दायर नियुक्ति घोटाले के किसी मामले में आरोप तय किये गये हैं. अदालत में अब इस मामले की नियमित सुनवाई शुरू होगी.

इडी की भी कार्रवाई : गौरतलब है कि 22 जुलाई, 2022 को प्रवर्तन निदेशालय (इडी) ने पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी को गिरफ्तार किया था. उस समय उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी के टॉलीगंज और बेलघरिया स्थित फ्लैटों से भारी मात्रा में नकदी और गहने बरामद किये गये थे. इडी के अनुसार, अर्पिता के फ्लैटों से करीब 50 करोड़ रुपये नकद, पांच करोड़ रुपये से अधिक के सोने-चांदी के गहने और विदेशी मुद्रा जब्त की गयी थी. जांच एजेंसी ने दावा किया था कि जब्त संपत्ति का कुल मूल्य 60 करोड़ रुपये से अधिक है.

अन्य मामलों के भी आरोपी हैं पार्थ : पार्थ चटर्जी का नाम केवल इस मामले में ही नहीं, बल्कि ग्रुप-सी और ग्रुप-डी के अलावा प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति घोटाले में भी सामने आया है. सीबीआइ ने हाल ही में नौवीं व दसवीं कक्षा और 11वीं तथा 12वीं कक्षा में नियुक्ति घोटाले से जुड़ी अंतिम चार्जशीट दाखिल की थी. अलीपुर अदालत में ग्रुप-सी मामले की चार्जशीट भी पिछले दिनों जमा की गयी. इस तरह चटर्जी कई अलग-अलग चार्जशीट में आरोपी के तौर पर नामित हैं.

राजनीति और शिक्षा जगत में हलचल : नियुक्ति घोटाले से जुड़े मामलों के सामने आने के बाद बंगाल की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था दोनों को हिला कर रख दिया. विपक्ष लगातार राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगा रहा है, जबकि आरोपियों का कहना है कि उन्हें बेवजह फंसाया जा रहा है. अदालत में आरोप तय होने के बाद अब नियमित सुनवाई शुरू होगी और माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में इस घोटाले की परतें और खुलेंगी.

पार्थ चटर्जी ने अदालत से कहा – मैं निर्दोष हूं

पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी फिलहाल बीमार हैं और अस्पताल में भर्ती हैं. बुधवार को उनकी आंख का ऑपरेशन हुआ था. इसी वजह से गुरुवार को उन्होंने काला चश्मा पहनकर अस्पताल के बेड से ही वर्चुअल माध्यम से अदालत में हाजिरी दी. पेशी के दौरान श्री चटर्जी ने अदालत से भावुक अपील करते हुए कहा: मैं पूरी तरह निर्दोष हूं. मुझे करीब साढ़े तीन साल से बेवजह जेल में रखा गया है. एसएससी एक स्वतंत्र निकाय है. नियुक्तियों का जिम्मा उसका था, मंत्री होने के नाते मेरा कोई सीधा हाथ नहीं था. उन्होंने आगे कहा: मैं 25 साल से विधायक हूं. मेरा सामाजिक सम्मान है. मुझे राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया है. कृपया मुझे रिहा किया जाये. हालांकि अदालत ने उनकी इन दलीलों को खारिज कर दिया और साफ कहा कि मंत्री रहते हुए उन्हीं की देखरेख में आरोपित अधिकारियों की नियुक्तियां हुईं.

परेश चंद्र अधिकारी और उनकी बेटी पर गड़बड़ी का आरोप

शिक्षक नियुक्ति घोटाले के मामले में पूर्व राज्य मंत्री परेश चंद्र अधिकारी और उनकी बेटी अंकिता अधिकारी पर भी गंभीर आरोप लगे हैं. उन पर ओएमआर शीट में गड़बड़ी और हेरफेर का आरोप है. दोनों ने भी अदालत के सामने खुद को निर्दोष बताते हुए मामले से बरी करने की मांग की.

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Published by: Sandip tiwari

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