कहा : चंद्रयान 2 का मिशन सफल
इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में पीएम के उद्घाटन भाषण के दौरान तकनीकी खामी, पांच मिनट के लिए बंद हुआ भाषण
कोलकाता : इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल 2019 का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम फटाफट युग में जी रहे हैं. इसका मानों ज्वर चढ़ा हुआ है. दो मिनट में नूडल और 30 मिनट में हमें पिज्जा चाहिए. लेकिन विज्ञान के साथ फटाफट संस्कृति की सोच सही नहीं है.
हो सकता है कि विज्ञान के जरिये तात्कालिक लाभ न हो, लेकिन आनेवाली कई पीढ़ियों को इससे लाभ मिल सकता है. वैज्ञानिक मानसिकता के साथ काम करने पर लंबी अवधि का लाभ और समाधान मिल सकता है. वैज्ञानिकों को अपने कार्य के दौरान अंतर्राष्ट्रीय नियमों का भी ध्यान रखना जरूरी है. विज्ञान में असफलता नहीं होती, केवल प्रयास, प्रयोग और आखिर में सफलता होती है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि चंद्रयान 2 का मिशन सफल रहा. हो सकता है कि सबकुछ योजना के मुताबिक नहीं हुआ था, पर मिशन सफल था. यह मिशन वैज्ञानिक इतिहास का एक मजबूत मोड़ साबित होगा. इस मिशन के चलते बच्चों में विज्ञान के प्रति उत्सुकता जगी. चंद्रयान 2 की यही सफलता है. प्रधानमंत्री ने वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि वह प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के उपाय ढूंढ़े, बिजली के भंडारण की बेहतर तकनीक इजाद करें, सौर ऊर्जा के उपयोग को और बेहतर तरीके से करने और बढ़ाने के समाधान निकालें.
श्री मोदी का कहना था कि कोई भी देश विज्ञान के बगैर प्रगति नहीं कर सकता. विज्ञान के संबंध में भारत का समृद्ध अतीत रहा है. इस संबंध में उसका गौरवशाली वर्तमान है. लिहाजा भविष्य के प्रति हमारी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है. प्रधानमंत्री ने वैज्ञानिक मानसिकता को साथ लेकर विज्ञान को समर्पित इको सिस्टम के गठन पर जोर दिया.
विश्व बांग्ला कनवेंशन सेंटर में आयोजित आइआइएसएफ 2019 के उद्घाटनके मौके पर तकनीकी खामी देखने को मिली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े थे, उनके भाषण के दौरान तकनीकी समस्या देखने को मिली. प्रधानमंत्री का भाषण करीब पांच मिनट के लिए थम गया. पांच मिनट बाद भाषण शुरू हो गया. हालांकि बाद में फिर कुछ देर तक लिप सिंक (वीडियो व आवाज का तारतम्य) का अभाव देखने को मिला. उद्घाटन कार्यक्रम में राज्यपाल जगदीप धनखड़, केंद्रीय मंत्री डॉ हर्षवर्द्धन के अलावा म्यांमार, अफगानिस्तान और भूटान के कई मंत्री भी पहुंचे थे.
