राज्य में अब तक 19 की मौत, 11 हजार 500 लोग चपेट में
कोलकाता : महानगर में डेंगू का प्रकोप बढ़ रहा है. इससे अब तक 19 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 11 हजार पांच सौ लोग चपेट में आ चुके हैं. यह सबसे अधिक उत्तर 24 परगना जिले में कहर बरपा रहा है. कोलकाता नगर निगम के अनुसार महानगर के इस वर्ष जनवरी से 19 सितंबर तक 602 लोग डेंगू की चपेट में आ चुके हैं, जबकि एक से नौ सितंबर के बीच कोलकाता में 114 लोग डेंगू के शिकार हुए.
कोलकाता के बोरो 10 में सबसे अधिक लोग इस मच्छर जनित बीमारी की चपेट में हैं. बोरो स्थित वार्ड 99 में करीब 73 लोग डेंगू की चपेट में हैं. महानगर में डेंगू की रोकथाम के लिए कोलकाता नगर निगम की ओर से वार्ड स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है. इस अभियान में अब विभिन्न कमेटियों को भी जोड़ा गया है. डेंगू के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने वाले पूजा कमेटियों को निगम की ओर से ‘स्वास्थ्य बंधंन’ श्रेष्ठ पूजा सम्मान से सम्मानित किया जायेगा.
कोलकाता नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि डेंगू के खतरनाक वायरस महानगर में फैल रहे हैं, जो महानगर के लिए खतरे की घंटी है. विशेषज्ञों के अनुसार डेंगू का वायरस मूल रूप से चार तरह का होता है. डेन 1, डेन 2, डेन 3 और डेन 4 सोरोटाइप. डेंगू डेन 2 और डेन 4 सोरोटाइप अधिक खतरनाक माने जाते हैं. गत वर्ष कोलकाता में डेंगू फैलानेवाले मच्छरों में डेन -2 वायरस मिले थे, लेकिन विशेषज्ञों की माने तो इस साल डेंगू फैलानेवाले मच्छरों में चारों तरह के वायरस मिल रहे हैं, जो और भी खरतनाक साबित हो सकता है.
ज्ञात हो कि डेन 1 और डेन 3 सोरोटाइप के मुकाबले डेन 2 और डेन 4 सोरोटाइप कम खतरनाक होता है. डेन 4 वायरस से शॉक के साथ बुखार और प्लेट्लेट्स में कमी आती है, जबकि डेन 2 में प्लेट्लेट्स में तीव्र कमी, बुखार, अंगों में शिथिलता और डेंगू शॉक सिंडरोम प्रमुख लक्षण हैं. डेंगू पीड़ित मरीज को हर किस्म में हैमरेजिंग बुखार होने का खतरा रहता है.
तीन तरह का होता है डेंगू
स्कूल ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसीन के वायरोलॉजिस्ट के अनुसार, डेंगू तीन तरह का होता है. क्लासिकल (साधारण) डेंगू, डेंगू हेमरेजिक फीवर (डीएचएफ) और तीसरा डेंगू शॉक सिंड्रोम (डीएसएस), डीएचएफ व डीएसएस की चपेट में आने से मरीज की मौत हो सकती है.
डेंगू से बचाव के तरीके
डेंगू से बचाव के लिए जरूरी है कि डेंगू के मच्छरों के काटने से बचे और इन मच्छरों के फैलने पर नियंत्रण रखा जाये. डेंगू के मच्छरों को कंट्रोल करने के लिए उसके पनपने की जगहों को ही नष्ट कर देना चाहिए.
