कोलकाता : आखिर कब मिलेंगे चिटफंड पीड़ितों के रुपये

कोलकाता : राज्य में चिटफंड कांड के पीड़ितों की संख्या करीब पांच करोड़ है. विभन्न चिटफंड कंपनियों ने आम लोगों के लगभग चार लाख करोड़ रुपये डकार लिये. सबसे बुरी हालत लाखों एजेंटों की है, जिन्होंने लोगों से निवेश कराये. हजारों अभी भी बेघर रहने को मजबूर हैं. आखिर चिटफंड कांड के पीड़ितों के रुपये […]

कोलकाता : राज्य में चिटफंड कांड के पीड़ितों की संख्या करीब पांच करोड़ है. विभन्न चिटफंड कंपनियों ने आम लोगों के लगभग चार लाख करोड़ रुपये डकार लिये. सबसे बुरी हालत लाखों एजेंटों की है, जिन्होंने लोगों से निवेश कराये. हजारों अभी भी बेघर रहने को मजबूर हैं. आखिर चिटफंड कांड के पीड़ितों के रुपये कब वापस मिलेंगे?

एक बार फिर यह सवाल ऑल बंगाल चिटफंड सफरर्स वेलफेयर एसोसिशन ने उठाया है.गुरुवार को कोलकाता प्रेस क्लब में आयोजित संवाददाता सम्मेलन के दौरान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष रूपम चौधरी ने राज्य में चिटफंड कांड पीड़ितों को मुआवजा दिये जाने, मामले के तमाम दोषियों पर कार्रवाई करने सहित छह सूत्री मांग भी रखी.

साथ ही राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्र सरकार से मांगों को जल्द पूरा करने की मांग दोहरायी है. दूसरी ओर संगठन की ओर से चेतावनी दी गयी कि यदि चिटफंड कांड पीड़ितों की मांगें जल्द पूरी नहीं हुई तो देशभर में व्यापक आंदोलन किया जायेगा. रूपम चौधरी ने आरोप लगाया है कि चिटफंड कांड पीड़ितों को मुआवजा देने के लिये राज्य सरकार ने जो वायदा किया था, उसे पूरा नहीं किया गया.

कथित तौर पर पहले चरण मेें राज्य सरकार की ओर से करीब 500 करोड़ रुपये पीड़ितों को देने की घोषणा की गयी थी. इसके लिये कई उत्पादों में अतिरिक्त कर भी लगाये गये थे. संगठन द्वारा जुटाये तथ्यों के आधार पर प्रारंभिक चरण में महज 139 करोड़ रुपये ही चिटफंड पीड़ितों को मिल पाये. अन्य राज्य जैसे ओड़िशा में ऐसी स्थिति नहीं है. वहां की सरकार ने चिटफंड पीड़ितों को प्रथम चरण में 300 करोड़ रुपये देने की घोषणा की और उसे पूरा भी किया.

पश्चिम बंगाल में पहले चरण में चिटफंड कांड पीड़ितों को जितने रुपये वापस करने की बात कही गयी थी, वे रुपये कहां गये? इसको को लेकर राज्य सरकार श्वेत पत्र जारी करे. ताकि लोग सही तथ्यों को जान सकें.
संगठन की ओर से कहा गया कि चिटफंड कांड में सबसे ज्यादा बुरी स्थिति एजेंटों की है. हजारों एजेंट अभी भी घर छोड़ने को मजबूर हैं. आरोप के अनुसार, कई एजेंटों को झूठे मामले में फंसाने की धमकी देने का सिलसिला भी जारी है. चिटफंड कांड पीड़ितों की समस्याओं के समाधान के लिए संगठन के पदाधिकारी अभी तक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मिल नहीं पाये हैं.
हालांकि गत वर्ष फरवरी महीने में शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने संगठन के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी. कथित तौर पर एजेंटों की सुरक्षा व अन्य समस्याओं के जल्द समाधान का आश्वासन भी दिया था लेकिन स्थिति सुधरी नहीं. संगठन की ओर से दावा किया गया कि इसके बाद चिटफंड कांड पीड़ित के करीब 21 लोगों की अस्वाभाविक मौत की घटनाएं घटी.
संगठन की ओर से कहा गया है कि चिटफंड कांड पीड़ितों की छह सूत्री मांगों को लेकर मार्च महीने तक राज्य के प्रति पंचायत प्रधान, पार्षद, नगरपालिका के चेयरमैन, नगर निगम के आयुक्त को ज्ञापन सौंपे जायेंगे. इतना ही नहीं दो मार्च को चिटफंड कांड मामले को लेकर हावड़ा में जनता की अदालत का आयोजन किया जायेगा.

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