महानगर के कॉलेज को मिला सौर ऊर्जा परियोजना का काम

कोलकाता: एनएचपीसी ने महानगर की रिनिवेबल एनर्जी कॉलेज को 50 मेगावाट की क्षमता वाले फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट लगाने का ठेका दिया है. यह विश्व का पहला फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट होगा. गौरतलब है कि केरल में जलाशयों की संख्या काफी अधिक है, इसलिए इसे देखते हुए यहां फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट के विकास पर […]

कोलकाता: एनएचपीसी ने महानगर की रिनिवेबल एनर्जी कॉलेज को 50 मेगावाट की क्षमता वाले फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट लगाने का ठेका दिया है. यह विश्व का पहला फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट होगा.

गौरतलब है कि केरल में जलाशयों की संख्या काफी अधिक है, इसलिए इसे देखते हुए यहां फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट के विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है. पायलट प्रोजेक्ट के तहत इस प्लांट में अक्तूबर महीने से बिजली उत्पादन शुरू किया जायेगा. यह जानकारी रिनिवेबल एनर्जी कॉलेज के चेयरमैन शांतिपद गनचौधरी ने दी. उन्होंने बताया कि एनएचपीसी ने 50 मेगावाट बिजली उत्पादन करनेवाली इस प्लांट के लिए कॉलेज से तकनीकी सहायता व इंस्टालेशन के बारे में जानकारियां उपलब्ध कराने को कहा है. इस 50 मेगावाट के सोलर प्लांट के लिए करीब 350-400 करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे. बताया जाता है कि प्लांट में स्थापना कार्य पूरा करने तक कॉलेज को ही इसके उत्पादों की व्यवस्था करने को कहा गया है.

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष कॉलेज ने विभिन्न क्षेत्रों में सोलर पैनल लगा कर साबित किया था कि बड़े जलाशयों में भी बिजली उत्पादन किया जा सकता है. पश्चिम बंगाल, असम, ओड़िशा, आंध्र प्रदेश व दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों में इस पद्धति का प्रयोग कर बिजली समस्या का समाधान किया जा सकता है. क्योंकि इससे जमीन कीमत के रूप में कुछ खर्च नहीं करना होगा, इससे बिजली उत्पादन खर्च भी कम होगा.

उन्होंने बताया कि अक्तूबर महीने में यहां प्रथम चरण में 12 किलो वाट बिजली का उत्पादन होगा, जिस पर करीब 35 लाख रुपये खर्च किये जायेंगे. यह संपूर्ण राशि न्यू एंड रिनिवेबल एनर्जी मिनिस्ट्री की ओर से खर्च की जायेगी.

इस संबंध में चिल्का डेवलपमेंट अथॉरिटी (सीडीए) व केरल एयरपोर्ट अथॉरिटी ने भी कॉलेज के पास प्रस्ताव भेजा है. गौरतलब है कि चिल्का लेक 1100 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है. देश में जमीन अधिग्रहण को लेकर जो समस्या है, ऐसे में यह जलाशय इसका वैकल्पिक समाधान हो सकते हैं. क्योंकि एक मेगावाट बिजली का उत्पादन करने के लिए करीब चार एक एकड़ जमीन की आवश्यकता होती है और इसके लिए सात करोड़ रुपये खर्च करने होते हैं. इससे बिजली का उत्पादन खर्च आठ रुपये प्रति यूनिट होता है. लेकिन जलाशय में चार एकड़ से 10-20 प्रतिशत कम जगह में एक मेगावाट बिजली का उत्पादन हो सकता है. यहां पर प्रति मेगावाट बिजली उत्पादन में 6.5 करोड़ रुपये खर्च होंगे और बिजली उत्पादन खर्च सात रुपये प्रति यूनिट होगा.

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