जल्दबाजी में नेतृत्व परिवर्तन कोई हल नहीं : वासुदेव

कोलकाता: लोकसभा चुनाव में राज्य में माकपा नीत वाममोरचा के बेहद खराब प्रदर्शन के बाद खोया जनाधार फिर से प्राप्त करने के उपायों को लेकर वामपंथी खेमे में मतभेद उभरने लगे हैं. मतभेद इस बात को लेकर है कि क्या नेतृत्व में परिवर्तन किया जाये या खोयी ताकत वापस पाने के लिए नीतियों में बदलाव […]

कोलकाता: लोकसभा चुनाव में राज्य में माकपा नीत वाममोरचा के बेहद खराब प्रदर्शन के बाद खोया जनाधार फिर से प्राप्त करने के उपायों को लेकर वामपंथी खेमे में मतभेद उभरने लगे हैं.

मतभेद इस बात को लेकर है कि क्या नेतृत्व में परिवर्तन किया जाये या खोयी ताकत वापस पाने के लिए नीतियों में बदलाव किया जाये या फिर जनाधार बढ़ाने पर ध्यान दिया जाये. लोकसभा चुनाव में राज्य में वाममोरचा महज दो सीटों पर ही जीत हासिल कर पायी. इस करारी शिकस्त के बाद उसके राष्ट्रीय पार्टी के दर्जे पर सवाल उठने लगे हैं. माकपा समेत तमाम वामपंथी पार्टियों ने हार के कारणों तथा सांगठनिक ताकत मजबूत करने व आगे के कदम पर मंथन करना शुरू कर दिया है.

यद्यपि हार के कारणों में संकट के समय पार्टी नेताओं की ओर से दिशा-निर्देश मुहैया कराने में असफलता, संगठन में खामी, दोषपूर्ण राजनीतिक रूख, तृणमूल कांग्रेस की ओर से कथित धांधली आदि को गिनाया गया, लेकिन पार्टी के लिए कभी उसके गढ़ रहे यानी बंगाल में अपना जनाधार वापस प्राप्त करने के तरीके को तय करना बाकी है. माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य के बर्धराजन ने हार की मुख्य वजह कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस द्वारा की गयी हिंसा व कई क्षेत्रों में धांधली को बताया है. दूसरी ओर, उन्होंने यह भी कहा कि लोग तृणमूल कांग्रेस के साथ इसलिए गये क्योंकि उन्हें महसूस नहीं हुआ कि वाममोरचा एकमात्र विकल्प है. पार्टी के कई आला नेताओं का यह भी मानना है कि राज्य में वाममोरचा में जान फूंकने के लिए उठाये जाने वाले कदमों को लेकर पार्टी के भीतर मतभेद हैं. ऐसा इसलिए, क्योंकि पार्टी में एक वर्ग ऐसा है जो शीर्ष से लेकर नीचे तक नेतृत्व परिवर्तन चाहता है, जबकि अन्य का मानना है कि बुरे वक्त में नेतृत्व में परिवर्तन नुकसानदेह हो सकता है, इसलिए लोगों से संपर्क बढ़ाना काफी अहम है.

लोकसभा चुनाव में माकपा नीत वाममोरचा के खराब प्रदर्शन के मसले पर माकपा केंद्रीय समिति के सदस्य वासुदेव आचार्य का कहना है कि वे नहीं मानते हैं कि जल्दबाजी में नेतृत्व परिवर्तन कोई हल है. परिवर्तन एक प्रक्रिया है जिसके तहत हम नये नेताओं को लाते हैं. उनका निजी तौर पर मानना है कि जनता तक पहुंच बनाने के लिए ज्वलंत मुद्दों पर जन आंदोलनों को बढ़ाने की जरूरत है. बांकुड़ा संसदीय सीट पर तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार एवं अभिनेत्री मुनमुन सेन से पराजित हुए आचार्य ने वाम आंदोलन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए उसके रूख पर पुनर्विचार करने की जरूरत पर जोर दिया.

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