जगह-जगह पर पड़ी दरारें, कई जगहों पर उग गये हैं पीपल के पेड़
करीब चार साल पहले केएमसी ने की थी मरम्मत
कोलकाता : सियालदह स्थित सेतु की उम्र अब 36 साल हो गयी है. ऊपर से ट्रैफिक के बेतहाशा बोझ ने इसे कमजोर कर दिया है. अगर जल्द ही इसकी मरम्मत नहीं की गयी तो यहां भी बड़ा हादसा हो सकता है. विद्यापति सेतु 24 घंटे व्यस्त रहता है.
विदित हो कि इस सेतु का उद्घाटन 1981 में तत्कालीन कोलकाता के मेयर कमल कुमार बसु के हाथों कराया गया था.अब सेतु में जगह-जगह दरारें पड़ गयी हैं. कई जगहों पर पीपल के पेड़ उग गये हैं, जो इसे और भी कमजोर बना रहा है. नियमानुसार साल में दो बार सेतु का हेल्थ चेकअप होना चाहिए, लेकिन सेतु की वर्तमान हालत देख कर यही लगता है कि शायद ही इसका फिटनेस टेस्ट भी किया जाता है.
बता दें कि सेतु का निर्माण कोलकाता मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (केएमडीए) ने करवाया था. सेतु की देख-रेख का जिम्मा भी केएमडीए पर ही है. इस सेतु के नीचे बाजार है, जहां हॉकर बारिश तथा धूप से बचने के लिए सेतु के दीवार में बांध कर त्रिपाल टांग रखे हैं.
उधर, गुरुवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस सेतु के पास से सभी हॉकरों को हटाने का निर्देश दिया है. इसकी देख-रेख के संबंध में कोलकाता नगर निगम के 49 बंगव वार्ड के पार्षद अपराजिता दास गुप्ता ने बताया कि यहां वर्षों से हॉकर दुकान लगा रहे हैं.
अगर सीएम ने उन्हें हटाने का निर्देश दिया है तो जरूर उनके निर्देश का पालन किया जायेगा. सेतु की रेलिंग से त्रिपाल टांगने के विषय में उन्होंने कहा कि यहां बैठने वाले हॉकर विशेष कर बारिश के दिनों में ऐसा करते हैं. इससे बारिश के दिनों में डेंगू फैलने का भी भय रहता है.
इसलिए हम समय-समय पर अभियान चला कर त्रिपाल हाट देते हैं. उन्होंने कहा कि करीब चार से पांच वर्ष पहले निगम के कहने पर केएमडीए ने इसके पिलर की मरम्मत की थी. इसके बाद कभी इसकी मरम्मत नहीं की गयी. वहीं केएमडीए के एक अधिकारी ने बताया कि जुलाई में विद्यापति सेतु की फिटनेस की जांच की गयी है. यह जांच वर्ष में दो बार की जाती है.
