कोलकाता : महानगर में जर्जर इमारतों को तोड़ने के लिए कोलकाता नगर निगम के पास नया कानून तो है, लेकिन इस पर अमल नहीं किया जा रहा है. जर्जर इमारतों में रहनेवाले किरायेदार व मकान मालिक भी इन्हें तोड़ कर मरम्मत या निर्माण कराने को राजी हैं.
इसके मद्देनजर निगम के मासिक अधिवेशन में 99 नंबर वार्ड के वाममोर्चा पार्षद देवाशीष मुखर्जी ने सदन में इस मुद्दे से संबंधित एक प्रस्ताव रखा. उनके सवाल के जवाब में मेयर शोभन चटर्जी ने कहा कि जर्जर इमारतों को तोड़ने या मरम्मत करवाने के लिए निगम की ओर से लगातार दबाव बनाया जा रहा है.
मेयर ने सदन को संबोधित करते हुए बताया कि निगम की म्यूनिसिपल बिल्डिंग कमेटी की धारा 142 के तहत 212 जर्जर इमारतों को तोड़ कर पुनर्निर्माण के लिए अनुमति दी गयी है. इन इमारतों को तोड़ने के लिए निगम ने पहले 412 (ए) के तहत नोटिस दिया था.
इमारतों के निर्माण के लिए निगम ने मकान मालिकों को प्रस्ताव भी भेजा है. किरायेदार व मकान मालिक दोनों पक्ष इमारत को तोड़ कर बनाने के लिए तैयार हैं. इन इमारतों के किरायेदार और मकान मालिक बिल्डिंग निर्माण के लिए तैयार हुए हैं. वहीं, अन्य 13 जर्जर इमारतों के मालिकों से संबंधित मामलों की सुनवाई चल रही है. सुनवाई के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जायेगी, जिससे इमारतों की मरम्मत या निर्माण हो सके.
कहां कितनी जर्जर इमारतें
मेयर ने कहा : इस बीच, हमने बोरो स्तर पर सर्वे कर ऐसी कई जर्जर इमारतों की पहचान कर निगम की धारा 412 (ए) के तहत नोटिस भेजा है. करीब 52 जर्जर इमारतों को नोटिस दिया गया है. इनमें बोरो दो में 8, बोरो चार में 37, बोरो छह में 4, बोरो सात में 1, बोरो आठ में एक तथा बोरो 12 में एक जर्जर इमारत शामिल है.
