कभी बुद्धदेव बाबू के पास नहीं होते थे रिजर्वेशन टिकट खरीदने के पैसे

पूर्व मंत्री अशोक भट्टाचार्य ने बताया कि एक समय ऐसा भी था, जब बुद्धदेव बाबू के पास रिजर्वेशन तक के रुपये नहीं थे. वह ट्रेन की जनरल बोगी में सफर करते थे.

पूर्व मंत्री अशोक भट्टाचार्य ने साझा की पूर्व सीएम से जुड़ीं यादेंकोलकाता. पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य से जुड़ीं कई यादें राज्य के पूर्व मंत्री अशोक भट्टाचार्य ने साझा कीं. उन्होंने कहा, “जब डीवाइएफआइ के पहले सम्मेलन में उनसे मुलाकात हुई थी, तब मैं एसएफआइ से जुड़ा था. उनके साथ लंबे समय तक काम किया. सीएम बनने से पहले जब भी वह सिलीगुड़ी आते, मेरे घर में ही रुकना पसंद करते थे. वह दार्जिलिंग मेल से यात्रा करते थे. साथ में एक बैग होता था, जिसमें कुछ कपड़े रखे होते थे. एक दिन की घटना याद आती है. वह रात में सो रहे थे. कमरे की खिड़की खुली हुई थी. मौका देख किसी चोर ने बुद्धदेव बाबू की धोती, पंजाबी व एक घड़ी उड़ा ली. दूसरे दिन वह मेरा कुर्ता पहन कर कोलकाता रवाना हुए थे. जो घड़ी चोरी हुई थी, उससे उन्हें काफी लगाव था. किसी रिश्तेदार ने उन्हें भेंट में दी थी. ” पूर्व मंत्री ने बताया कि एक समय ऐसा भी था, जब बुद्धदेव बाबू के पास रिजर्वेशन तक के रुपये नहीं थे. वह ट्रेन की जनरल बोगी में सफर करते थे. कई बार तो ट्रेन में बैठने की जगह नहीं मिलती, खड़े-खड़े कोलकाता पहुंच जाते. जब 1977 में वह मंत्री बने, तब से सर्किट हाउस में ठहरने लगे थे. पहाड़ से लेकर कामतापुरी आंदोलनों को वह बेहतर तरीके से सुलझाने में जुटे रहते. रोते-रोते अशोक भट्टाचार्य ने कहा कि ईमानदारी के साथ राजनीति की जा सकती है, यह बुद्धदेव बाबू से ही सीखा था. वह कभी खराब शब्दों का इस्तेमाल नहीं करते थे. कभी कुछ कह भी देते, तो उसमें सुधार कर फिर से बोलते थे. इस तरह के लोग राजनीति में विरल हैं.

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