पेयजल की भारी किल्लत से जूझ रहे जामुड़िया के केंदा क्षेत्र के ग्रामीणों का धैर्य मंगलवार को जवाब दे गया. पानी नहीं तो वोट नहीं और डेढ़ हजार में क्या होगा? पानी खरीदें या घर चलाएं?.जैसे नारों के साथ आक्रोशित ग्रामीणों ने रानीगंज-पांडवेश्वर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच)-14 को पूरी तरह जाम कर दिया. सड़क पर उतरे पुरुषों और महिलाओं ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और जल्द से जल्द जलापूर्ति सामान्य करने की मांग की. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पिछले सात-आठ महीनों से इलाके में पेयजल की आपूर्ति पूरी तरह बंद है.कोयला खनन प्रभावित क्षेत्र होने के कारण यहाँ का भू-जल स्तर काफी नीचे चला गया है, जिससे कुएं, तालाब और अन्य स्थानीय जलस्रोत सूख चुके हैं. ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र की जीवन रेखा मानी जाने वाली ‘काला झरिया वाटर प्रोजेक्ट’ लंबे समय से बदहाल स्थिति में है, जिसके कारण हजारों की आबादी बूंद-बूंद पानी को तरस रही है.
‘भत्ते का आधा पानी में जायेगा तो कैसे चलेगा घर खर्च’
आंदोलनकारियों ने सरकार की आर्थिक सहायता योजनाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें 700-800 रुपये खर्च कर बाहर से पानी का टैंकर मंगवाना पड़ रहा है. ग्रामीणों ने तीखे लहजे में पूछा, “सरकार से मिलनेवाले डेढ़ हजार रुपये में से अगर आधा हिस्सा पानी खरीदने में ही चला जायेगा, तो हम घर का खर्च कैसे चलाएंगे?’ सप्ताह के दूसरे कार्यदिवस (मंगलवार) को व्यस्त समय पर सड़क जाम होने के कारण पांडवेश्वर के पंजाबी मोड़ की ओर जाने वाला यातायात पूरी तरह बाधित हो गया. दफ्तर जाने वाले कर्मचारी और स्कूल-कॉलेज के छात्र घंटों जाम में फंसे रहे. सूचना मिलते ही जामुड़िया थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों को समझा-बुझाकर जाम हटाने का प्रयास किया. प्रशासन की ओर से मिले ठोस आश्वासन के बाद ही प्रदर्शनकारी सड़क से हटे.
चुनाव बहिष्कार की चेतावनी
आगामी विधानसभा चुनाव से पहले ग्रामीणों का यह कड़ा रुख राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है. प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जलापूर्ति की समुचित व्यवस्था नहीं की गयी, तो वे आनेवाले चुनाव में मतदान का बहिष्कार करेंगे और आंदोलन को और उग्र बनायेंगे.
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