आर्थिक तंगी के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर
चमके आदिवासी फुटबॉलर सुरजीत हेमब्रम

माता‑पिता दिहाड़ी मजदूर, परिवार जुटा रहा मदद: सुरजीत इच्छापुर हाइस्कूल में दसवीं कक्षा के छात्र हैं.

श्रीलंका में होने वाले नाइन‑ए‑साइड साउथ एशियन गेम्स में खेलने का मिला मौका, खर्च जुटाने की चुनौती दुर्गापुर. गरीबी और अभाव को पीछे छोड़कर बांसगौड़ा जंगलपाड़ा के 16 वर्षीय सुरजीत हेमब्रम ने फुटबॉल में राष्ट्रीय पहचान हासिल कर ली है. हाल ही में मध्य प्रदेश में हुई 13वीं जूनियर और सब‑जूनियर नाइन‑ए‑साइड फुटबॉल प्रतियोगिता में बंगाल टीम की ओर से खेलते हुए उन्होंने अंडर‑17 वर्ग का सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर पुरस्कार जीता. इसी प्रदर्शन की बदौलत उन्हें सितंबर में श्रीलंका में होने वाले नाइन‑ए‑साइड साउथ एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करने का निमंत्रण मिला है. मगर विदेशी दौरे के लिये पासपोर्ट, किट और अन्य जरूरी खर्च जुटाना परिवार के लिये मुश्किल साबित हो रहा है. माता‑पिता दिहाड़ी मजदूर, परिवार जुटा रहा मदद: सुरजीत इच्छापुर हाइस्कूल में दसवीं कक्षा के छात्र हैं. उनके माता‑पिता गोबिन और पत्नी दोनों दिहाड़ी मजदूर हैं. घर में दादी और छोटी बहन भी हैं, जिससे रोजमर्रा का खर्च ही कठिनाई से पूरा होता है. फ़ेडरेशन केवल श्रीलंका जाने का किराया वहन करेगा, बाकी खर्च परिवार को उठाना है. पिता गोबिन हेमब्रम ने कहा कि वे बेटे की सफलता से खुश हैं, मगर आर्थिक साधन सीमित हैं. स्कूल के शिक्षक, समाजसेवी चिरंजीत धीवर और कुछ शुभचिंतक मदद का हाथ बढ़ा रहे हैं. साथ‑साथ केंद्रीय खेल संगठन ‘साई’ से संपर्क करके आगे की योजना पर चर्चा चल रही है. फिलहाल सुरजीत कोलकाता फिफ्थ डिवीजन लीग में श्याम पार्क स्पोर्टिंग क्लब के लिए खेलते हैं. उनके अलावा बंगाल के मृदुल बर्मन (अलीपुरद्वार), देबानंद महतो (झारग्राम) और सूरज सोरेन (बिष्णुपुर) को भी इस साल की राष्ट्रीय टीम में जगह मिली है. परिवार और स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि आवश्यक सहयोग समय पर मिल गया, तो सुरजीत अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश और बंगाल का नाम रोशन करेंगे.

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Published by: Ganesh mahto

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