महाकुंभ भगदड़ का दर्द आज भी जिंदा, मुआवजे का इंतजार

25 लाख देने की घोषणा के बाद भी मृतक के परिजनों को मिले सिर्फ 5 लाख रुपये, प्रशासन पर लापरवाही का आरोप

जामुड़िया. आस्था के सबसे बड़े समागम महाकुंभ में पिछले वर्ष हुई भगदड़ की पीड़ा आज भी कई परिवारों के दिलों में जिंदा है. खासकर जामुड़िया के केंदा बाउरी पाड़ा के उस परिवार के लिए, जिसने इस हादसे में न केवल अपना मुखिया खो दिया, बल्कि अब सरकारी तंत्र की बेरुखी और अधूरे वादों से भी जूझ रहा है.

25 लाख के वादे, हकीकत में 5 लाख

पिछले साल 29 जनवरी को मौनी अमावस्या के दौरान प्रयागराज में हुई भगदड़ ने पूरे देश को झकझोर दिया था. उस समय उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रत्येक मृतक के परिजनों को 25 लाख मुआवजा देने की घोषणा की थी. केंदा बाउरी पाड़ा निवासी मृतक विनोद रुइदास के परिवार का आरोप है कि उन्हें अब तक केवल 5 लाख की राशि ही मिली है.

परिजनों का कहना है कि प्रशासन ने शेष राशि किस्तों में देने की बात कही थी, लेकिन घटना को एक वर्ष बीत जाने के बाद भी अगली किस्त का कोई पता नहीं है. इस देरी ने सरकारी घोषणा पर सवाल खड़े कर दिये हैं.

बिना दस्तावेज भेज दिया गया शव

विनोद रुइदास की मौत के बाद प्रशासनिक लापरवाही के आरोप भी सामने आये हैं. परिजनों के अनुसार, विनोद का शव बिना किसी आधिकारिक दस्तावेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट या मृत्यु प्रमाण पत्र के, केवल एक कांस्टेबल के माध्यम से घर भेज दिया गया था. बाद में काफी प्रयासों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया गया.

आर्थिक तंगी में परिवार

विनोद अपने परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे. उनके पीछे बुजुर्ग माता-पिता, पत्नी और तीन बच्चे हैं, जो 10वीं, 8वीं और 6वीं कक्षा में पढ़ाई कर रहे हैं. वर्तमान में परिवार की आय का एकमात्र सहारा बुजुर्ग पिता की कभी-कभार मिलने वाली दिहाड़ी मजदूरी है. इसके अलावा मुआवजे की राशि पर मिलने वाला ब्याज, राज्य सरकार की लक्ष्मी भंडार योजना और सरकारी राशन पर ही परिवार निर्भर है.

विनोद के निधन के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा गयी है और बच्चों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ती जा रही है.

आंकड़ों और जवाबदेही पर सवाल

सरकारी आंकड़ों में इस हादसे में 33 मौतें दर्ज की गयी थीं, जबकि स्वतंत्र सूत्रों के अनुसार मृतकों की संख्या 70 से अधिक बतायी गयीं थीं. आंकड़ों को लेकर उठे सवाल और मुआवजे में हो रही देरी ने उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं. पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें सिर्फ इंसाफ चाहिए और वह वादा पूरा होना चाहिए, जो दुख की घड़ी में सरकार ने किया था.

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By Ganesh mahto

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