रानीगंज.
लंबे समय से बंद पड़ी महावीर(आर)कोलियरी को एक बार फिर से जीवंत करने की दिशा में प्रशासनिक हलचल तेज हो गयी है. ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड(इसीएल) के अमृतनगर ग्रुप ऑफ माइन्स ने कोलियरी को दोबारा खोलने और इसके विकास के लिए व्यापक स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है. इसी कड़ी में, प्रभावित होनेवाले क्षेत्रों के पुनर्वास व पुनर्स्थापन के लिए सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण करने का निर्णय लिया गया है. इसीएल की ओर से रानीगंज के ब्लॉक विकास अधिकारी (बीडीओ) को भेजे गए एक आधिकारिक पत्र के अनुसार, अमर महावीर कोल माइन्स प्राइवेट लिमिटेड को इस कोलियरी के विकास और संचालन का जिम्मा सौंपा गया है.इस परियोजना के दायरे में आने वाले एगरा, सियारसोल और रानीगंज शहर के कुछ हिस्सों का स्थानांतरण प्रस्तावित है. इसके लिए ””छोटा नागपुर क्राफ्ट डेवलपमेंट सोसाइटी”” द्वारा सामाजिक-आर्थिक प्रभाव मूल्यांकन और सर्वेक्षण किया जाएगा.इस सर्वेक्षण कार्य को लेकर रानीगंज ब्लॉक प्रशासन ने सकारात्मक रुख अपनाया है.बी़डीओ ने संबंधित दस्तावेज पर अनुमति दी जा सकती है और आगे की कार्रवाई का रास्ता तय करने की दिशा में कार्य करेगी है,बीते जनवरी माह में ईसीएल द्वारा रानीगंज बीडीपी को दिए गए पत्र की प्रतियां जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और स्थानीय पंचायतों को भी भेजी गई हैं, ताकि क्षेत्र में शांतिपूर्ण ढंग से सर्वेक्षण कार्य पूरा किया जा सके.
पिछला संदर्भ : खत्म होगा वर्षों का इंतजार
गौरतलब है कि महावीर कोलियरी क्षेत्र यह वही क्षेत्र है जहाँ 1989 में प्रसिद्ध ””महाबीर कोलियरी रेस्क्यू”” हुआ था, जिसमें इंजीनियर जसवंत सिंह गिल ने 65 खनिकों की जान बचाई थी. सुरक्षा कारणों और तकनीकी जटिलताओं की वजह से यहाँ खनन कार्य काफी समय से ठप पड़ा था.अब पुनः कोल इंडिया इस अंचल में मौजूद कोयला को निकालने की जिम्मेदारी अमर महाबीर कोल माइंस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को दिया है.सूत्रों के अनुसार साल 2025 की शुरुआत में ही इसके संचालन के लिए वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया था. अब 2026 की शुरुआत में विस्थापन और पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू होना इस बात का संकेत है कि परियोजना अब कागजों से निकलकर धरातल पर आने वाली है.
