नगर निगम के 3000 कर्मचारियों के पीएफ का पैसा किया जमा, आंदोलन अब भी जारी
आसनसोल नगर निगम के सफाई कर्मचारियों को आंदोलन करने का बड़ा लाभ मिला, अप्रैल 2025 से बकाया पीएफ का पैसा निगम ने जमा कराया, हालांकि सभी कर्मचारियों का पैसा अभी जमा नहीं हुआ है.
आसनसोल नगर निगम के सफाई कर्मचारियों को आंदोलन करने का बड़ा लाभ मिला, अप्रैल 2025 से बकाया पीएफ का पैसा निगम ने जमा कराया, हालांकि सभी कर्मचारियों का पैसा अभी जमा नहीं हुआ है. निगम के चेयरमैन अमरनाथ चटर्जी ने बताया कि बोरो संख्या तीन से आठ के अंतर्गत काम करने वाले सभी सफाई कर्मचारियों के पीएफ का पैसा शुक्रवार जमा करा दिया गया है. बोरो संख्या एक, दो और नौ, दस के कर्मचारियों का पूरा हिसाब अबतक नहीं मिला है कि कितने दिन इनलोगों ने काम किया है. यह हिसाब मिलते ही इनका भी पैसा जमा करा दिया जाएगा. इसके बाद भी सफाई कर्मचारी काम बंद करके दूसरे दिन भी नगर निगम कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया. इनके काम बंद करने से शहर में गंदगी का अंबार जमने लगा है, जो इलाके के लोगों के लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है.
निगम में विपक्ष की नेत्री चैताली तिवारी ने बताया कि लोगों से सफाई कर के रूप में 30 रुपये प्रतिमाह लिया जाता है, ये पैसा जाता कहां हैं? शहर में चारों ओर गंदगी की अंबार है, दो दिन में माध्यमिक परीक्षा शुरू होगी, स्कूलों के सामने कूड़ा का ढेर जमा है. इससे बच्चों को भारी परेशानी होगी.
चुनाव के पहले अपनी मांगों को लेकर ताल ठोक रहे सफाईकर्मी
15 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन, सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, कार्य के दौरान मारे जाने, बीमार या लाचार होने पर आश्रित को पांच लाख रुपये भुगतान करने सहित 14 सूत्री मांगों के समर्थन में आशा कर्मियों ने 2026 विधानसभा चुनाव से काम बंद करके आंदोलन शुरू किया. 23 दिसम्बर से जारी आंदोलन अब भी जारी है. इन्ही की तर्ज पर आसनसोल नगर निगम के सफाई कर्मचारियों ने भी शुक्रवार से काम बंद करके आंदोलन शुरू कर दिया है. इनकी भी मांग है कि प्रतिमाह 15 हजार रुपये वेतन देना होगा, दिहाड़ी श्रमिक से कैजुअल लेबर बनाना और सारी सुविधाएं देना, इएसआइ के दायरे में लाना और स्थायी पहचान पत्र देना शामिल है. निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि चुनाव के पहले सभी अपनी समस्यायों को लेकर ताल ठोक रहे हैं. यह एक सोची समझी प्लानिंग है. आसनसोल नगर निगम के सफाई कर्मचारियों को पूरे राज्य में सबसे अधिक पैसा मिलता है. चुनाव के पहले सरकार को ब्लैकमेलिंग करने की रणनीति के तहत यह लोग काम कर रहे हैं. एक साल पहले भी इनलोगों ने आंदोलन किया और 60 रुपये वेतन में बढ़ोतरी हुई. 50 रुपये पीएफ में और दस रुपये वेतन के साथ दिया गया. दिहाड़ी हाजिरी 347 रुपये से बढ़ाकर 407 रुपये किया गया. फिर एक साल बाद इसी मुद्दे को लेकर आंदोलन करना कहां तक जायज है.