रानीगंज विस सीट : अंडाल फैक्टर पर टिकी ‘आर-पार’ की जंग

पश्चिम बंगाल के औद्योगिक केंद्र रानीगंज में विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है.

रानीगंज.

पश्चिम बंगाल के औद्योगिक केंद्र रानीगंज में विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है. 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान से पहले यहां तृणमूल कांग्रेस और भारतीय भाजपा के बीच सीधा मुकाबला बेहद दिलचस्प मोड़ पर है. ऐतिहासिक कोयलांचल क्षेत्र की यह सीट न सिर्फ आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि राजनीतिक रूप से भी राज्य की सबसे हाई-प्रोफाइल सीटों में गिनी जा रही है.

वामपंथी गढ़ से सीधी टक्कर तक का सफर

रानीगंज विधानसभा सीट कभी वामपंथ का अभेद्य किला मानी जाती थी. 1977 से 2006 तक माकपा ने लगातार 11 चुनाव जीतकर अपना दबदबा कायम रखा, लेकिन 2011 के सत्ता परिवर्तन के साथ ही समीकरण बदलने लगे. 2021 के चुनाव में मुकाबला पूरी तरह टीएमसी और भाजपा के बीच सिमट गया था. पिछले चुनाव में टीएमसी के तापस बनर्जी ने भाजपा के डॉ.बिजन मुखर्जी को महज 3,556 वोटों के बेहद कम अंतर से हराया था. वोट प्रतिशत (टीएमसी 42.9% और भाजपा 40.95%) के इसी मामूली अंतर ने इस सीट को इस बार भी ‘हॉट सीट’ बना दिया है.

वार्ड बनाम ब्लॉक: जीत का गणित

करीब 2.57 लाख मतदाताओं वाली इस सीट पर चुनावी समीकरण दो हिस्सों, रानीगंज शहर और अंडाल ब्लॉक में बंटा हुआ है.

शहरी वार्डों में भाजपा की बढ़त:

आसनसोल नगर निगम के तहत आने वाले 11 वार्डों में से पिछले चुनाव में भाजपा ने 9 वार्डों में बढ़त बनायी थी.

अंडाल में टीएमसी का पलड़ा भारी:

अंडाल ब्लॉक ने 2021 में टीएमसी की जीत सुनिश्चित की थी, जहां से पार्टी को निर्णायक बढ़त मिली थी. दिलचस्प बात यह है कि इस बार दोनों प्रमुख उम्मीदवार, टीएमसी के कालोबरन मंडल और भाजपा के पार्थो घोष, अंडाल क्षेत्र से ही आते हैं. भाजपा जहां अंडाल में सेंध लगाने की रणनीति पर काम कर रही है, वहीं टीएमसी शहरी क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी है.

सामाजिक समीकरण व स्थानीय मुद्दे

रानीगंज की करीब 88.61% आबादी शहरी है, जहां हिंदी भाषी श्रमिक मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं. जातिगत समीकरणों की बात करें तो यहां अनुसूचित जाति 22.89%, मुस्लिम मतदाता 14.80% और अनुसूचित जनजाति की आबादी 3.44% है. 2024 के लोकसभा चुनाव में भी टीएमसी ने यहां भाजपा पर महज 4,452 वोटों की बढ़त दर्ज की थी, जो कांटे की टक्कर की तस्दीक करता है.

राजनीतिक दांव-पेच के बीच स्थानीय मुद्दे भी मतदाताओं के रुझान को प्रभावित कर रहे हैं. कोयला उद्योग यहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन इसके साथ ही भूमि धंसाव, प्रदूषण और वन क्षेत्र में कमी जैसी गंभीर समस्याएं बनी हुई हैं. बेहतर रेल और सड़क संपर्क के बावजूद पीने के पानी की किल्लत और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव जनता के लिए बड़ा मुद्दा है.

नतीजों पर टिकी सबकी नजर

रानीगंज में इस बार मुकाबला ‘आर-पार’ का माना जा रहा है. भाजपा जहां अपने शहरी वोट बैंक के भरोसे जीत का दावा कर रही है, वहीं टीएमसी अंडाल ब्लॉक में अपनी जमीनी पकड़ के दम पर सत्ता बरकरार रखने की कोशिश में है. हालांकि वाम दलों की भूमिका सीमित दिख रही है, लेकिन उनका वोट बैंक किसी भी तरफ झुका तो समीकरण बदल सकते हैं. अब सबकी निगाहें 23 अप्रैल के मतदान और 4 मई को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं.

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लेखक के बारे में

Author: AMIT KUMAR

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