दुर्गापुर पूर्व विधानसभा सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले से बढ़ी सियासी सरगर्मी

दुर्गापुर पूर्व विधानसभा सीट राज्य की प्रमुख औद्योगिक व शहरी सीटों में गिनी जाती है.

दुर्गापुर.

दुर्गापुर पूर्व विधानसभा सीट राज्य की प्रमुख औद्योगिक व शहरी सीटों में गिनी जाती है. कभी वाममोर्चा का गढ़ रही इस सीट पर वर्तमान में तृणमूल कांग्रेस के प्रदीप मजूमदार विधायक व मंत्री हैं, जिन्हें इस बार भी टिकट मिला है. उनके सामने भाजपा के चंद्रशेखर बनर्जी और वाममोर्चा के श्रमिक नेता सीमांत चटर्जी मैदान में हैं. श्रमिक इलाकों में सीमांत चटर्जी के प्रभाव को वाममोर्चा के लिए अहम माना जा रहा है.

भाजपा की बढ़ती सक्रियता और तृणमूल का भरोसा

पिछले पांच वर्षों में खासकर टाउनशिप इलाके में भाजपा ने संगठनात्मक पकड़ मजबूत की है. वार्ड स्तर पर विस्तार, युवाओं की भागीदारी और महिला संगठन की सक्रियता बढ़ी है. दूसरी ओर प्रदीप मजूमदार अपने विकास कार्यों और राज्य सरकार की योजनाओं के आधार पर आश्वस्त नजर आ रहे हैं. तृणमूल कांग्रेस का मानना है कि पिछले कार्यकाल के विकास का लाभ चुनाव में मिलेगा.

पिछले चुनावी नतीजों से समझें समीकरण

इस सीट पर मुकाबला परंपरागत रूप से तृणमूल कांग्रेस और वाममोर्चा के बीच रहा है, लेकिन इस बार भाजपा की मौजूदगी से संघर्ष रोचक हो गया है. 2011 में तृणमूल कांग्रेस के निखिल कुमार बनर्जी ने 87,050 वोट के साथ जीत दर्ज की थी. 2016 में माकपा के संतोष देब राय 84,200 वोट लेकर विजयी रहे. 2021 में प्रदीप मजूमदार ने 79,303 वोट हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि भाजपा के कर्नल दीप्तांसु चौधरी 75,557 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे.

सामाजिक संरचना भी निर्णायक

दुर्गापुर पूर्व विधानसभा क्षेत्र में स्टील टाउनशिप के साथ कांकसा ब्लॉक के अमलाजोरा, गोपालपुर और मलानदिघी शामिल हैं. यहां बंगाली हिंदुओं की बहुलता है, जबकि बिहार, उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों से आए प्रवासी मजदूर भी प्रभाव रखते हैं. अनुसूचित जाति मतदाताओं की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत से अधिक मानी जाती है, जो चुनावी परिणाम में अहम भूमिका निभा सकती है.

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By AMIT KUMAR

AMIT KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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